जल्द आएंगे ड्राफ्ट दिशा-निर्देश
मुंबई, 5 अगस्त 2026, वाय के न्यूज। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए कर्ज पर ब्याज दर तय करने से जुड़े नियमों में व्यापक बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। केंद्रीय बैंक ने बुधवार को घोषणा की कि वह ब्याज दरों से संबंधित मौजूदा नियामकीय ढांचे की समीक्षा करेगा और इसे अधिक सरल, तर्कसंगत तथा सिद्धांत-आधारित बनाया जाएगा।
आरबीआई के अनुसार, प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य बैंकों और अन्य विनियमित वित्तीय संस्थानों के बीच ब्याज दर निर्धारण के नियमों में एकरूपता लाना, पारदर्शिता बढ़ाना और ग्राहकों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
केंद्रीय बैंक ने बताया कि इस संबंध में जल्द ही मसौदा दिशा-निर्देश (Draft Guidelines) सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किए जाएंगे। हितधारकों से सुझाव प्राप्त होने के बाद अंतिम नियम अधिसूचित किए जाएंगे।
समीक्षा के दौरान एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट (EBLR) और मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) से जुड़े प्रावधानों पर भी विचार किया जाएगा। साथ ही, ऋण पर ब्याज लगाने की प्रणाली, ब्याज दरों के रीसेट की प्रक्रिया और ग्राहकों को जानकारी उपलब्ध कराने के नियमों को अधिक स्पष्ट एवं पारदर्शी बनाने पर जोर रहेगा।
फिलहाल आरबीआई ने कोई नया नियम लागू नहीं किया है। यह केवल नियामकीय ढांचे में सुधार की प्रक्रिया की शुरुआत है। मसौदा जारी होने के बाद प्राप्त सुझावों के आधार पर अंतिम दिशा-निर्देश लागू किए जाएंगे।
यह घोषणा आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद की गई, जिसमें रेपो दर को लगातार दूसरी बार 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का निर्णय लिया गया।
