CCPA ने 1,338 गैर-अनुरूप खिलौनों की बिक्री पर कार्रवाई की, प्लेटफॉर्म को लिस्टिंग और बिक्री रोकने का निर्देश
नई दिल्ली, 11 सितंबर। वाय के न्यूज़।
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने Flipkart पर ऐसे खिलौनों की लिस्टिंग, विज्ञापन और बिक्री की सुविधा देने के मामले में 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है, जो अनिवार्य भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) मानकों के अनुरूप नहीं थे। CCPA के अनुसार चार विक्रेताओं के माध्यम से ऐसे 1,338 खिलौने बेचे गए।
CCPA ने Flipkart को गैर-अनुरूप खिलौनों को अपने प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध, प्रदर्शित, विज्ञापित या बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं कराने का निर्देश दिया है। उसे आदेश के 15 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट भी देनी है।
खिलौनों के लिए BIS प्रमाणन क्यों जरूरी है
भारत में खिलौनों की सुरक्षा के लिए Toys (Quality Control) Order, 2020 लागू है। इस व्यवस्था के तहत संबंधित खिलौनों के लिए निर्धारित भारतीय मानकों का पालन और BIS प्रमाणन जरूरी है। BIS के आधिकारिक दस्तावेज में सामान्य खिलौनों की सुरक्षा के लिए IS 9873 और विद्युत खिलौनों के लिए IS 15644 मानक निर्धारित हैं।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों के इस्तेमाल में आने वाला खिलौना निर्धारित सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करे। खासकर छोटे बच्चों के मामले में खिलौने का मुंह में जाना, छोटे हिस्सों का अलग होना, नुकीले किनारे, यांत्रिक जोखिम या विद्युत सुरक्षा जैसे पहलू महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
BIS के उत्पाद प्रमाणन ढांचे में खिलौनों के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप परीक्षण और प्रमाणन की व्यवस्था है। BIS के आधिकारिक उत्पाद मैनुअल में IS 9873 के तहत Safety of Toys के लिए प्रमाणन आवश्यकताओं का उल्लेख है।
IS 9873 और IS 15644 में क्या फर्क है
IS 9873 मुख्य रूप से सामान्य खिलौनों की सुरक्षा से संबंधित मानक है। इसके तहत खिलौने की विभिन्न सुरक्षा आवश्यकताओं की जांच की जाती है।
वहीं IS 15644 विद्युत खिलौनों की सुरक्षा से संबंधित है। इसमें बिजली से चलने वाले खिलौनों के लिए विद्युत सुरक्षा से जुड़े परीक्षण और आवश्यकताएं शामिल हैं। BIS की अनिवार्य प्रमाणन सूची में दोनों मानकों को Toys (Quality Control) Order, 2020 से जोड़ा गया है।
ऑनलाइन खिलौना खरीदते समय ग्राहक क्या देखें
ऑनलाइन खिलौना खरीदते समय केवल तस्वीर, कीमत या ब्रांड देखकर निर्णय लेना पर्याप्त नहीं है। ग्राहक को उत्पाद की जानकारी में BIS प्रमाणन और मानक चिह्न की जानकारी देखनी चाहिए।
खिलौने की पैकेजिंग पर निर्माता या आयातक की जानकारी, उत्पाद की आयु-सीमा और अन्य अनिवार्य विवरण भी देखना उपयोगी है। विशेष रूप से छोटे बच्चों के खिलौनों में यह देखना महत्वपूर्ण है कि उनमें ऐसे छोटे हिस्से तो नहीं हैं जिन्हें बच्चा आसानी से निकालकर निगल सकता है।
Flipkart के मामले में क्या मिला
CCPA की जांच के अनुसार चार विक्रेताओं ने Flipkart के माध्यम से 1,338 गैर-अनुरूप खिलौने बेचे। इनकी बिक्री से विक्रेताओं को लगभग 54.56 लाख रुपये की आय हुई, जबकि Flipkart को इन लेन-देन से लगभग 14.28 लाख रुपये फीस मिलने की बात CCPA के आदेश में दर्ज है।
Flipkart ने अपने बचाव में खुद को एक मध्यस्थ ऑनलाइन मार्केटप्लेस बताते हुए कहा था कि उत्पादों के BIS अनुपालन की जिम्मेदारी संबंधित विक्रेताओं की है। CCPA ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि प्लेटफॉर्म की भूमिका केवल तकनीकी मध्यस्थ तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसने लिस्टिंग, होस्टिंग, विज्ञापन, प्रचार और बिक्री को सुगम बनाया।
मामला अब कर्नाटक हाई कोर्ट में भी
Flipkart ने CCPA के 5 लाख रुपये के जुर्माने को कर्नाटक हाई कोर्ट में चुनौती दी है। 3 सितंबर 2026 को हाई कोर्ट ने कंपनी से यह बताने वाला हलफनामा मांगा कि उसके प्लेटफॉर्म पर केवल BIS-अनुरूप उत्पादों की लिस्टिंग और बिक्री सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था है। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
