भ्रामक ऑनलाइन बिक्री पर सरकार का अंकुश, मनमानी नहीं चलेगी

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छूट दिखाने वाली कंपनियों को पुरानी कीमत भी बतानी होगी; सर्च रिजल्ट में हेरफेर और डार्क पैटर्न पर सख्ती

नई दिल्ली, 10 सितम्बर। वाय के न्यूज़। ऑनलाइन खरीदारी में उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले तरीकों पर सरकार ने अंकुश लगाने की तैयारी की है। उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 में किए गए संशोधनों के बाद कंपनियों को कीमत, छूट, सर्च रिजल्ट और शिकायतों से जुड़ी जानकारी में अधिक पारदर्शिता रखनी होगी।

छूट कितनी असली, यह पता चलेगा

किसी सामान पर छूट दिखाने पर कंपनी को उसकी नई कीमत के साथ पुरानी कीमत भी बतानी होगी। पुरानी कीमत वही होगी, जो छूट की घोषणा से पहले के 30 दिनों में उस सामान की सबसे कम रही हो।

इससे ऑनलाइन खरीदारी करते समय ग्राहक को यह समझने में मदद मिलेगी कि दिखाई जा रही छूट किस आधार पर है।

सर्च में भी मनमानी पर रोक

कंपनियां सर्च रिजल्ट में इस तरह बदलाव नहीं कर सकेंगी, जिससे किसी खास सामान को अनुचित तरीके से ऊपर दिखाया जाए। पैसे देकर ऊपर दिखाए जाने वाले प्रायोजित उत्पादों की सूची में भी पारदर्शिता रखनी होगी।

ऐसे ऑनलाइन तरीके, जिनसे ग्राहक को भ्रमित करके खरीदारी या कोई अतिरिक्त विकल्प चुनने के लिए मजबूर किया जाता है, भी नए नियमों के दायरे में होंगे।

विदेशी सामान पर भी पूरी जानकारी

विदेश से मंगाए गए सामान की बिक्री में उसके मूल देश और आयातक की जानकारी देना जरूरी होगा। इससे ग्राहक को उत्पाद के स्रोत की जानकारी मिल सकेगी।

शिकायत की प्रति भी मिलेगी

हर ई-कॉमर्स कंपनी को राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन की शिकायत व्यवस्था से जुड़ना होगा। शिकायत दर्ज होने पर कंपनी के शिकायत अधिकारी द्वारा दर्ज की गई शिकायत की एक प्रति ग्राहक को भी देनी होगी।

उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार संशोधित नियमों का उद्देश्य ई-कॉमर्स कारोबार में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना तथा उपभोक्ता सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को कम करना है।

संशोधित नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।

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