भारत ने ब्रिक्स देशों के साथ साझा व्यापार मंच का दिया सुझाव, ऋण, बाजार और आसान व्यापार नियमों तक पहुंच को बताया जरूरी
नई दिल्ली, 10 सितंबर। वाय के न्यूज़।
भारत में महिला उद्यमियों को बैंकिंग, ऋण और स्वयं सहायता समूहों के जरिए आर्थिक रूप से मजबूत करने के बाद अब उन्हें विश्व बाजार से जोड़ने की पहल पर जोर दिया जा रहा है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ब्रिक्स देशों से महिलाओं के नेतृत्व वाले कारोबार के लिए साझा व्यापार मंच बनाने की सिफारिश की है।
गोयल ने कहा कि महिला उद्यमियों के सामने तीन बड़ी चुनौतियां हैं—ऋण तक पहुंच, खरीदारों और बाजारों तक पहुंच तथा स्पष्ट और भरोसेमंद व्यापार नियमों की उपलब्धता। साझा ब्रिक्स मंच इन बाधाओं को कम करने में मदद कर सकता है।
भारत के अनुभव को आधार बनाया
इस प्रस्ताव के पीछे भारत में महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के बड़े स्तर के प्रयासों को आधार बनाया गया है। गोयल के मुताबिक देश में करीब 30 करोड़ महिलाओं के बैंक खाते खोले गए हैं और लगभग 10 करोड़ ग्रामीण महिलाएं करीब 90 लाख स्वयं सहायता समूहों, सहकारी समितियों और महिला समूहों से जुड़ी हैं।
उन्होंने बताया कि 3 करोड़ से ज्यादा महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, यानी अपनी आय से सालाना एक लाख रुपये से अधिक कमाने वाली महिलाओं की संख्या इस स्तर तक पहुंची है।
छोटे उद्यमियों को दिए गए करीब 56 करोड़ ऋणों में 68 प्रतिशत से ज्यादा ऋण महिलाओं को दिए जाने का दावा भी गोयल ने किया। सरकार का अनुभव है कि बैंकिंग और ऋण की पहुंच बढ़ने से महिलाओं के लिए छोटे कारोबार को आगे बढ़ाने का रास्ता खुला है।
अब खरीदारों तक पहुंचाने की कोशिश
गोयल ने सुझाव दिया कि ब्रिक्स देशों के लिए एक साझा डिजिटल व्यापार मंच बनाया जाए, जहां महिला उद्यमियों को अपने उत्पादों की मांग, संभावित खरीदारों और कारोबार से जुड़ी जानकारी मिल सके। इससे अलग-अलग देशों की महिला उद्यमियों के लिए सीधे नए बाजार तलाशना आसान हो सकता है।
उन्होंने महिला उद्यमियों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों, कारोबारी सम्मेलनों, खरीदार-विक्रेता बैठकों और व्यापार मंचों में भागीदारी बढ़ाने की भी बात कही। कपड़ा जैसे क्षेत्रों में महिला-नेतृत्व वाले विशेष व्यापार प्रतिनिधिमंडल बनाने का सुझाव भी दिया गया।
महिला उन्नति कोष का प्रस्ताव
भारत ने ब्रिक्स के तहत महिला उन्नति कोष को एक ठोस पहल में बदलने का सुझाव दिया है। इसका उद्देश्य महिला उद्यमियों के लिए वित्तीय और कारोबारी अवसरों को बढ़ाना होगा।
गोयल ने इलेक्ट्रॉनिक व्यापार दस्तावेजों, ई-इनवॉयस, इलेक्ट्रॉनिक बिल ऑफ लेडिंग और ई-कस्टम्स घोषणाओं जैसे डिजिटल उपायों के लिए भी साझा व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया।
सेवा क्षेत्र में भी बड़ा अवसर
भारत ने महिलाओं के लिए केवल वस्तुओं के निर्यात में ही नहीं, बल्कि सेवा क्षेत्र और डिजिटल कारोबार में भी बड़ी संभावनाएं देखी हैं। गोयल के मुताबिक वैश्विक सेवा व्यापार करीब 10 ट्रिलियन डॉलर का है, जबकि ब्रिक्स देशों के बीच सेवा व्यापार की संभावनाओं का अभी पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हुआ है।
वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट जैसी पहलों के जरिए स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों से जोड़ने का भारत का अनुभव भी इस पहल में उपयोगी हो सकता है।
भारत का जोर अब यह है कि महिलाओं को केवल घरेलू स्तर पर कारोबार करने वाली उद्यमी के रूप में नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने वाली कारोबारी ताकत के रूप में आगे बढ़ाया जाए।
