पेंड्रा रोड तक तीसरी-चौथी रेल लाइन को मंजूरी, छत्तीसगढ़ के उद्योगों को मिलेगा बड़ा फायदा

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बिलासपुर-उस्लापुर-पेंड्रा रोड तीसरी और कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन को मंजूरी; तीन परियोजनाओं पर ₹10,783 करोड़ खर्च, माल ढुलाई क्षमता में 27 मिलियन टन सालाना इजाफे का अनुमान

रायपुर, 9 सितंबर, वाय के न्यूज।

छत्तीसगढ़ के रेल नेटवर्क और औद्योगिक लॉजिस्टिक्स को बड़ा विस्तार मिलने जा रहा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹10,783 करोड़ की लागत वाली तीन मल्टीट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें बिलासपुर (उस्लापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन और कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन छत्तीसगढ़ के लिए विशेष महत्व रखती हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने परियोजनाओं की मंजूरी का स्वागत करते हुए कहा कि इनसे प्रदेश के रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी। यात्री सुविधाओं के साथ उद्योग, व्यापार और माल परिवहन को भी गति मिलेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार जताया।

तीनों परियोजनाओं से रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में करीब 656 किलोमीटर की वृद्धि होगी। साथ ही माल ढुलाई क्षमता में करीब 27 मिलियन टन प्रतिवर्ष की अतिरिक्त क्षमता विकसित होने का अनुमान है।

कोयला, सीमेंट और स्टील की ढुलाई को मिलेगा फायदा

स्वीकृत रेल परियोजनाएं कोयला, सीमेंट, लोहा और इस्पात जैसी औद्योगिक वस्तुओं की ढुलाई के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। अतिरिक्त ट्रैक मिलने से मालगाड़ियों के संचालन के लिए क्षमता बढ़ेगी और यात्री ट्रेनों तथा मालगाड़ियों के बीच परिचालन दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।

छत्तीसगढ़ खनिज और औद्योगिक संसाधनों वाला राज्य है। ऐसे में रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ने का सीधा संबंध उद्योगों की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था से है। कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार उत्पादों को दूसरे राज्यों के बाजारों तक पहुंचाने में रेल की भूमिका और मजबूत होगी।

बिलासपुर-पेंड्रा-कटनी कॉरिडोर होगा मजबूत

बिलासपुर (उस्लापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन और कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन बनने से इस महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर पर अतिरिक्त ट्रैक क्षमता उपलब्ध होगी। इससे ट्रेनों का संचालन अधिक सुगम होने और रेल यातायात के दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।

इसका लाभ छत्तीसगढ़ से देश के दूसरे हिस्सों तक जाने वाली यात्री और मालगाड़ियों दोनों को मिल सकता है। पेंड्रा रोड क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत होने से आसपास के औद्योगिक और कारोबारी क्षेत्रों को भी बेहतर रेल नेटवर्क मिलेगा।

पांच राज्यों के 14 जिलों को लाभ

तीनों परियोजनाएं पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों से होकर गुजरेंगी। करीब 4,790 गांवों और लगभग 56 लाख की आबादी को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलने का अनुमान है। परियोजनाओं को वर्ष 2029-30 तक पूरा करने की योजना है।

पर्यटन और स्थानीय कारोबार को भी फायदा

बेहतर रेल कनेक्टिविटी से अचानकमार टाइगर रिजर्व, रतनपुर, मल्हार और खुटाघाट जैसे पर्यटन, धार्मिक और पुरातात्विक स्थलों तक पहुंच भी बेहतर होने की संभावना है। इससे पर्यटन से जुड़े स्थानीय कारोबार और रोजगार को लाभ मिल सकता है।

रेलवे के अनुमान के मुताबिक तीनों परियोजनाओं से करीब 12 करोड़ लीटर तेल आयात की बचत और लगभग 62 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में आधुनिक रेल अधोसंरचना का विस्तार तेजी से हो रहा है और छत्तीसगढ़ को भी इसका लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि नई मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएं प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों, औद्योगिक विकास और रोजगार की संभावनाओं को विस्तार देने के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को नई गति देंगी।

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