रायपुर 11सितंबर (वाय के न्यूज)। हरतालिका तीज के व्रत को लेकर इस वर्ष 13 और 14 सितंबर की तारीख को लेकर संशय बना हुआ है। पंचांग गणना के अनुसार भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि 13 सितंबर रविवार को सुबह 7:08 बजे शुरू होकर 14 सितंबर सोमवार को सुबह 7:06 बजे तक रहेगी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि तीज का व्रत 13 सितंबर को रखा जाए या 14 सितंबर को।
ज्योतिषाचार्यों के शास्त्रीय निर्णय और उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार हरतालिका तीज का मुख्य व्रत 14 सितंबर सोमवार को रखना अधिक उपयुक्त माना गया है। यही तिथि कई पंचांगों में भी हरतालिका तीज के रूप में दी गई है।
13 सितंबर को तृतीया शुरू होगी, लेकिन सूर्योदय पर द्वितीया
ज्योतिषाचार्य पं. प्रकाश तिवारी के अनुसार 13 सितंबर रविवार को सूर्योदय के समय अभी द्वितीया तिथि रहेगी और सुबह 7:08 बजे के बाद तृतीया का आरंभ होगा। इसलिए तिथि-निर्णय के दृष्टिकोण से 13 सितंबर की तृतीया को द्वितीया-विद्धा माना जा रहा है।
14 सितंबर को सूर्योदय के समय तृतीया विद्यमान
14 सितंबर सोमवार को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि विद्यमान रहेगी और इसका समापन सुबह 7:06 बजे होगा। इसलिए इस दिन सूर्योदय के साथ तृतीया प्राप्त हो रही है। पंचांग गणना में भी 14 सितंबर को हरतालिका तीज का दिन बताया गया है और सुबह तृतीया तिथि रहते पूजन का मुहूर्त दिया गया है।
सुबह 6:05 से 7:06 तक विशेष पूजन
14 सितंबर को हरतालिका तीज का मुख्य पूजन सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक तृतीया तिथि के रहते करने की सलाह दी गई है। प्रकाशित पंचांग गणनाओं में भी 14 सितंबर को इसी अवधि के आसपास प्रातःकालीन हरतालिका पूजा का मुहूर्त दिया गया है।
इस दौरान महिलाएं निर्जला व्रत का संकल्प लेकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर सकती हैं। बालू अथवा मिट्टी से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर पूजा करने की परंपरा भी हरतालिका व्रत से जुड़ी है।
इस बार हरतालिका और गणेश चतुर्थी का विशेष संयोग
इस वर्ष एक और विशेष स्थिति है। 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे तृतीया समाप्त होकर चतुर्थी शुरू होगी। इस तरह एक ही दिन हरतालिका तीज की तृतीया तिथि और उसके बाद गणेश चतुर्थी की शुरुआत हो रही है। इस संयोग को लेकर भी इस वर्ष तीज की तारीख को लेकर विशेष चर्चा है। इसलिए 14 सितंबर को सुबह तृतीया रहते हरतालिका तीज का पूजन और उसके बाद चतुर्थी के आरंभ होने पर गणेश पूजन किया जा सकता है। हालांकि गणेश चतुर्थी के स्थानीय पूजा-मुहूर्त अलग से पंचांग के अनुसार देखे जाने चाहिए।
13 सितंबर की शाम तक तृतीया तिथि विद्यमान रहेगी। इसलिए कुछ स्थानीय परंपराओं में प्रदोषकाल में तृतीया को आधार मानकर पूजा करने की परंपरा हो सकती है। लेकिन यदि प्रश्न यह है कि इस वर्ष हरतालिका तीज का मुख्य व्रत किस तारीख को रखा जाए, तो उपलब्ध पंचांगों और सूर्योदय-आधारित तिथि निर्णय में 14 सितंबर सोमवार को ही तीज की मुख्य तिथि माना गया है।
15 सितंबर को होगा पारणा
14 सितंबर को निर्जला व्रत रखने वाली महिलाएं अगले दिन 15 सितंबर मंगलवार को सूर्योदय के बाद पारणा करेंगी। पारणा से पहले शिव-पार्वती की अंतिम पूजा, आरती और परंपरा के अनुसार विसर्जन की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसके बाद जल अथवा चरणामृत ग्रहण कर व्रत खोलने की परंपरा है।
13 सितंबर: सुबह 7:08 बजे से तृतीया प्रारंभ, लेकिन सूर्योदय पर द्वितीया।
14 सितंबर: सूर्योदय के समय तृतीया विद्यमान, सुबह 7:06 बजे तक तृतीया। हरतालिका तीज का मुख्य व्रत और पूजन।
14 सितंबर सुबह 7:06 बजे के बाद: चतुर्थी का आरंभ।
15 सितंबर: सूर्योदय के बाद व्रत का पारणा।
