नई दिल्ली, 23 जुलाई 2026 (वाय के न्यूज)। भारत ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी सफलता हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 350 किलोग्राम थ्रस्ट क्षमता वाला देश का पहला स्वदेशी डिस्पोजेबल टर्बोजेट इंजन विकसित किया है। इसे डीआरडीओ के गैस टर्बाइन अनुसंधान प्रतिष्ठान (GTRE) ने तैयार किया है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह इंजन डीआरडीओ के डिजाइन पर आधारित है। इसकी डिलीवरी भारतीय रक्षा उद्योग की बढ़ती तकनीकी क्षमता का प्रमाण है। मंत्रालय ने कहा कि यह उपलब्धि वर्षों की सटीक इंजीनियरिंग, उन्नत विनिर्माण और देश के वैज्ञानिकों तथा उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल का परिणाम है।
यह इंजन लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों, लॉयटरिंग म्यूनिशन (कामिकाज़े ड्रोन) और अन्य मानव रहित रक्षा प्रणालियों में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे ऐसे इंजनों के लिए विदेशों पर निर्भरता कम होगी और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को और मजबूती मिलेगी।
