GSLV-F17 ने रचा इतिहास, जियो-इमेजिंग उपग्रह को सब-GTO में पहुंचाया; कृषि, मौसम और आपदा प्रबंधन को मिलेगा बड़ा फायदा
श्रीहरिकोटा, 4 सितंबर, वाय के न्यूज। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्रवार तड़के अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F17 रॉकेट ने भारत के पहले समर्पित जियोसिंक्रोनस इमेजिंग उपग्रह EOS-05 का सफल प्रक्षेपण किया। प्रक्षेपण के करीब 18 मिनट बाद उपग्रह को निर्धारित सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (sub-GTO) में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया।
लगातार निगरानी की नई क्षमता
करीब 2,367 किलोग्राम वजनी EOS-05 को पृथ्वी की लगभग 36 हजार किलोमीटर ऊंचाई वाली जियोसिंक्रोनस कक्षा में स्थापित किए जाने के बाद यह भारत के एक बड़े क्षेत्र की लंबे समय तक लगातार निगरानी करने में सक्षम होगा। इससे कम ऊंचाई वाली कक्षाओं में घूमने वाले पारंपरिक पृथ्वी-अवलोकन उपग्रहों की तुलना में किसी क्षेत्र की अधिक निरंतर तस्वीरें और निगरानी संबंधी जानकारी हासिल करने की क्षमता बढ़ेगी।
कृषि से आपदा प्रबंधन तक उपयोग
EOS-05 से मिलने वाली इमेजिंग सूचनाओं का इस्तेमाल कृषि निगरानी, मौसम और पर्यावरणीय बदलावों के अध्ययन तथा बाढ़, चक्रवात और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान निगरानी एवं आकलन में किया जा सकेगा। लगातार निगरानी की क्षमता आपदा के समय प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति तेजी से समझने में मदद कर सकती है।
GSLV के लिए भी बड़ी उपलब्धि
यह मिशन GSLV-F17 के साथ भारत की जियो-इमेजिंग क्षमता को नई दिशा देता है। इसरो के आधिकारिक रिकॉर्ड में EOS-05 मिशन को 4 सितंबर 2026 के GSLV मिशन के रूप में दर्ज किया गया है।
EOS-05 मिशन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत को जियोसिंक्रोनस कक्षा से पृथ्वी की इमेजिंग के क्षेत्र में एक नई परिचालन क्षमता प्रदान करने की दिशा में बड़ा कदम है। उपग्रह के अंतिम कक्षीय चरण पूरे होने के बाद इसकी वास्तविक उपयोगिता और निगरानी क्षमता सामने आएगी।
