गहरे समुद्र में खनन की तैयारी तेज, भारत के पास 38 करोड़ टन तक पॉलीमेटैलिक नोड्यूल का अनुमान

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रणनीतिक खनिजों की आपूर्ति सुरक्षित करने पर जोर, 5 हजार मीटर से अधिक गहराई में स्वदेशी माइनिंग क्रॉलर का प्रदर्शन

नई दिल्ली, 8 सितंबर, वाय के न्यूज। भारत ने महत्वपूर्ण खनिजों की भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए गहरे समुद्र में खनन की दिशा में औद्योगिक भागीदारी बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईओटी) ने मंगलवार को नई दिल्ली में ‘गहरे समुद्र में खनन–व्यावसायिक अवसर और रणनीतिक महत्व’ विषय पर उद्योग संपर्क कार्यशाला आयोजित की।

कार्यशाला में नीति निर्माता, नियामक, तकनीक विकसित करने वाली संस्थाएं, अनुसंधान संस्थान और वित्तीय क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए। इसका उद्देश्य गहरे समुद्र में मौजूद खनिज संसाधनों की खोज से आगे बढ़कर उनके संभावित व्यावसायिक दोहन के लिए उद्योग जगत की भागीदारी तैयार करना है।

75 हजार वर्ग किमी क्षेत्र में भारत का अन्वेषण अधिकार

भारत के पास मध्य हिंद महासागर बेसिन में अंतरराष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण (ISA) के तहत 75,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में पॉलीमेटैलिक नोड्यूल के अन्वेषण का विशेष अनुबंध है। मंत्रालय के अनुसार इस क्षेत्र में करीब 366 से 380 मिलियन टन यानी 36.6 से 38 करोड़ टन पॉलीमेटैलिक नोड्यूल होने का अनुमान है।

इन नोड्यूल में निकेल, कोबाल्ट, तांबा और मैंगनीज जैसे महत्वपूर्ण खनिज पाए जाते हैं। ये खनिज बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहन, स्वच्छ ऊर्जा तकनीक, उन्नत विनिर्माण और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक व कंप्यूटिंग प्रणालियों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

5 हजार मीटर गहराई में स्वदेशी तकनीक का परीक्षण

भारत ने गहरे समुद्र में खनन के लिए तकनीकी क्षमता विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति की है। ₹4,077 करोड़ के राष्ट्रीय डीप ओशन मिशन के तहत एनआईओटी ने हिंद महासागर में 5,000 मीटर से अधिक गहराई पर स्वदेशी डीप-सी माइनिंग क्रॉलर सिस्टम का सफल प्रदर्शन किया है।

सरकार का लक्ष्य इस तकनीकी क्षमता को आगे विकसित करते हुए समुद्री खनिजों की खोज, निकासी और प्रसंस्करण से जुड़े पूरे औद्योगिक तंत्र को तैयार करना है।

खनन से धातु और बैटरी उद्योग तक का लक्ष्य

कार्यशाला में गहरे समुद्र में खनन को केवल समुद्र तल से खनिज निकालने की गतिविधि के बजाय एक व्यापक औद्योगिक अवसर के रूप में देखा गया। संभावित क्षेत्र में अपतटीय इंजीनियरिंग, समुद्री रोबोटिक्स, जहाज निर्माण, धातुकर्म और बैटरी निर्माण जैसे उद्योग शामिल हैं।

मंत्रालय के मुताबिक वैज्ञानिक क्षमता और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए नीतिगत ढांचे और वित्तीय रूप से व्यवहार्य परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार की जा रही है। गहरे समुद्र में खनन पर एक श्वेत पत्र भी तैयार किया जाना प्रस्तावित है।

अभी वाणिज्यिक खनन की अनुमति नहीं

हालांकि अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में खनिजों का व्यावसायिक खनन अभी शुरू नहीं हो सकता। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण द्वारा शोषण संहिता (Exploitation Code) जारी किया जाना जरूरी है। यानी भारत ने तकनीक और संसाधन पहचान के स्तर पर महत्वपूर्ण तैयारी कर ली है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में वास्तविक व्यावसायिक खनन के लिए नियामकीय प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।

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