शरीर की हलचल से बिजली बना सकेगी नई जैवसामग्री

यह समाचार साझा करें

WhatsApp Facebook X

पढ़ने की सुविधा

अपनी सुविधा के अनुसार अक्षर और कंट्रास्ट चुनें।

अक्षर आकार

भारतीय वैज्ञानिकों ने पेप्टाइड से तैयार की पीजोइलेक्ट्रिक सामग्री

नई दिल्ली, 3 सितंबर, वाय के न्यूज।

भारतीय वैज्ञानिकों ने पेप्टाइड से ऐसी नई जैवसामग्री बनाने का तरीका खोजा है, जो दबाव, खिंचाव या हलचल से बिजली पैदा कर सकती है। भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल शरीर के अंदर लगाए जाने वाले छोटे सेंसर और पहनने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में किया जा सकता है।

पेप्टाइड प्रोटीन बनाने वाले छोटे प्राकृतिक अणु होते हैं। वैज्ञानिकों ने इन्हीं पेप्टाइड अणुओं को एक खास तरीके से व्यवस्थित कर उनमें बिजली पैदा करने की क्षमता विकसित की।

यह शोध विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत बेंगलुरु स्थित सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (CeNS) ने IISER कोलकाता और JNCASR बेंगलुरु के साथ मिलकर किया है।

कैसे काम करती है यह सामग्री?

पीजोइलेक्ट्रिक सामग्री पर जब दबाव पड़ता है या उसे मोड़ा और खींचा जाता है, तो वह उस यांत्रिक ऊर्जा को बिजली में बदल सकती है।

वैज्ञानिकों ने पाया कि सामान्य पानी में पेप्टाइड अणु छोटे रेशे जैसी संरचना बनाते हैं, लेकिन उनमें बिजली पैदा करने की क्षमता नहीं दिखती। इसके बाद उपयुक्त सह-विलायक की करीब एक प्रतिशत मात्रा मिलाई गई। इससे पेप्टाइड अणुओं की आपसी व्यवस्था बदल गई और उनमें पीजोइलेक्ट्रिक गुण दिखाई देने लगे।

इस प्रक्रिया में पेप्टाइड की मूल रासायनिक संरचना को बदलने की जरूरत नहीं पड़ी।

मिली मजबूत प्रतिक्रिया

शोध के दौरान तैयार सामग्री ने करीब 30 pm V⁻¹ का पीजोइलेक्ट्रिक गुणांक दिखाया। वैज्ञानिकों के अनुसार पेप्टाइड से बनी सामग्री के लिए यह अच्छा प्रदर्शन है।

इस खोज से भविष्य में शरीर की प्राकृतिक गतिविधियों से मिलने वाली हल्की ऊर्जा का इस्तेमाल करने वाले उपकरण विकसित करने की संभावना बढ़ी है। उदाहरण के लिए, शरीर की हलचल, सांस लेने या धड़कन से पैदा होने वाली यांत्रिक ऊर्जा को बिजली में बदला जा सकता है।

वैज्ञानिकों ने इसके संभावित इस्तेमाल बायोसेंसर, पहनने योग्य इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक स्किन और शरीर में लगाए जाने वाले सेंसर जैसी तकनीकों में बताए हैं। हालांकि इनका वास्तविक चिकित्सीय इस्तेमाल अभी आगे के शोध और विकास पर निर्भर करेगा।

यह शोध Angewandte Chemie International Edition पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन का नेतृत्व CeNS के डॉ. गौतम घोष और पीएचडी शोधार्थी अपर्णा रमेश ने किया। शोध में सर्बजीत लायक, प्रो. नीलांजना सेनगुप्ता और तारक नाथ दास भी शामिल रहे।

पाठकों की पसंद

सबसे अधिक पढ़े गए

पिछले 7 दिनों के आधार पर