वैज्ञानिकों ने छोटे-छोटे जेल जैसे कणों पर किया प्रयोग, शरीर के खास हिस्से में दवा छोड़ने में हो सकती है मदद
नई दिल्ली, 2 सितंबर 2026। अगर दवा शरीर के उस हिस्से तक ही पहुंचे, जहां उसकी जरूरत है, तो इलाज ज्यादा प्रभावी हो सकता है और दवा के नुकसान भी कम हो सकते हैं। इसी दिशा में वैज्ञानिकों ने एक नई संभावना खोजी है। उन्होंने पता लगाया है कि तापमान में अचानक बदलाव करके बेहद छोटे जेल जैसे कणों के व्यवहार को बदला जा सकता है।
यह अध्ययन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (आरआरआई) के वैज्ञानिकों ने किया है।
ये छोटे कण क्या करते हैं?
वैज्ञानिकों ने जिन कणों पर प्रयोग किया, वे माइक्रोजेल से बने हैं। इन्हें ऐसे छोटे-छोटे जेल के दाने समझ सकते हैं, जो बहुत ज्यादा पानी सोख सकते हैं।
माइक्रोजेल अपने वजन से 300 से 500 गुना ज्यादा पानी सोख सकता है। इसी वजह से ऐसे पदार्थों का इस्तेमाल डायपर और सैनिटरी नैपकिन जैसी चीजों में भी होता है।
लेकिन इन कणों का एक और उपयोग है। इन्हें दवा को शरीर के अंदर सही जगह तक पहुंचाने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
तापमान बढ़ने पर बदल जाते हैं कण
वैज्ञानिकों ने देखा कि इन कणों को बहुत ज्यादा मात्रा में एक साथ रखने पर वे आपस में फंस जाते हैं। ऐसी स्थिति में वे आसानी से इधर-उधर नहीं जा पाते।
इसके बाद वैज्ञानिकों ने तापमान में अचानक बदलाव किया। इसे आसान भाषा में ‘तापमान का झटका’ कहा जा सकता है।
इस बदलाव के बाद कणों ने अपनी स्थिति बदलनी शुरू कर दी और कुछ समय के लिए पहले की तरह जमे रहने के बजाय बहने और फिर से व्यवस्थित होने लगे।
यानी तापमान में अचानक बदलाव ने कणों को अपनी पुरानी स्थिति से बाहर निकलने में मदद की।
दवा पहुंचाने में कैसे मिलेगी मदद?
माइक्रोजेल की खासियत यह है कि तापमान बदलने पर उनका आकार बदल सकता है।
ठंडे तापमान में ये कण फूल जाते हैं और दवा को अपने अंदर रख सकते हैं। जब तापमान करीब 34 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाता है तो ये सिकुड़ने लगते हैं और अपने अंदर रखी दवा को बाहर छोड़ सकते हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार, भविष्य में इस गुण का इस्तेमाल ऐसी दवा बनाने में किया जा सकता है, जो शरीर के किसी खास हिस्से तक पहुंचकर वहीं दवा छोड़े।
उदाहरण के लिए, यदि दवा को किसी ट्यूमर तक पहुंचाना हो तो ऐसी तकनीक से दवा को लक्षित जगह पर छोड़ने की संभावना बन सकती है। इससे शरीर के दूसरे हिस्सों पर दवा का असर कम करने में मदद मिल सकती है।
अभी शोध जारी रहेगा
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अभी शोध का शुरुआती चरण है। आगे वे यह समझने की कोशिश करेंगे कि अचानक तापमान बदलने के अलावा झटके या दबाव जैसे दूसरे बदलावों से भी इन कणों के व्यवहार को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है।
इस अध्ययन से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिली है कि तापमान बदलने पर बहुत छोटे कणों की स्थिति और उनका व्यवहार किस तरह बदलता है। भविष्य में इसका इस्तेमाल दवा पहुंचाने के साथ-साथ नई सामग्री बनाने जैसी तकनीकों में भी हो सकता है।
सरल शब्दों में:
वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि तापमान में अचानक बदलाव करके छोटे जेल जैसे कणों को अपनी स्थिति बदलने के लिए मजबूर किया जा सकता है। भविष्य में इन्हीं कणों की मदद से दवा को शरीर के जरूरत वाले हिस्से तक पहुंचाने की तकनीक विकसित की जा सकती है।
