क्वांटम कंप्यूटर से क्यों खतरे में पड़ सकती है आपकी डिजिटल सुरक्षा?

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आज सुरक्षित माने जाने वाले डिजिटल एन्क्रिप्शन को भविष्य के क्वांटम कंप्यूटर तोड़ सकते हैं; भारत ने संचार नेटवर्क को सुरक्षित रखने के लिए 14 स्वदेशी क्वांटम उत्पाद किए लॉन्च

नई दिल्ली, 31 अगस्त 2026। जिस तकनीक को कंप्यूटिंग की दुनिया में अगली बड़ी क्रांति माना जा रहा है, वही भविष्य में आपकी डिजिटल सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती भी बन सकती है। क्वांटम कंप्यूटर इतने शक्तिशाली हो सकते हैं कि आज इस्तेमाल होने वाली कुछ पारंपरिक क्रिप्टोग्राफिक प्रणालियों को तोड़ने की क्षमता हासिल कर लें। इसी संभावित खतरे को देखते हुए भारत ने अपने संचार नेटवर्क को क्वांटम युग के लिए सुरक्षित बनाने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं।

दूरसंचार विभाग के अनुसंधान एवं विकास केंद्र सी-डॉट ने अपने 43वें स्थापना दिवस पर क्वांटम कुंजी वितरण (QKD) और पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC) से जुड़े 14 स्वदेशी क्वांटम उत्पादों का अनावरण किया। इनका उद्देश्य भविष्य के क्वांटम कंप्यूटर से पैदा होने वाले साइबर सुरक्षा खतरों से संचार और संवेदनशील डेटा को सुरक्षित करना है।

क्वांटम कंप्यूटर से क्या खतरा है?

आज बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, सरकारी सेवाओं, क्लाउड सेवाओं और इंटरनेट संचार में डेटा को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत एन्क्रिप्शन तकनीकों का इस्तेमाल होता है। इन तकनीकों का एक बड़ा आधार यह धारणा है कि पारंपरिक कंप्यूटरों के लिए कुछ गणितीय समस्याओं को हल करना व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन है।

क्वांटम कंप्यूटर अलग तरीके से काम करते हैं। क्वांटम एल्गोरिदम विकसित होने के साथ वे कुछ ऐसी गणनाएं बहुत तेजी से कर सकते हैं, जिनमें पारंपरिक कंप्यूटरों को बेहद लंबा समय लग सकता है। इससे मौजूदा सार्वजनिक-कुंजी क्रिप्टोग्राफी की कुछ प्रणालियां भविष्य में कमजोर पड़ सकती हैं।

यानी खतरा केवल यह नहीं है कि भविष्य में कोई क्वांटम कंप्यूटर आज का पासवर्ड तोड़ देगा। बड़ी चिंता यह भी है कि अभी चोरी किए गए एन्क्रिप्टेड डेटा को भविष्य में अधिक शक्तिशाली कंप्यूटर की मदद से डिक्रिप्ट किया जा सकता है।

इसलिए शुरू हुई पोस्ट-क्वांटम सुरक्षा की तैयारी

इसी चुनौती से निपटने के लिए पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC) विकसित की जा रही है। इसका उद्देश्य ऐसी क्रिप्टोग्राफिक तकनीक तैयार करना है जो भविष्य के शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटर के सामने भी सुरक्षित रह सके।

सी-डॉट के नए उत्पादों में कई समाधान राष्ट्रीय मानक एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (NIST) के पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी एल्गोरिदम पर आधारित हैं। इन्हें एंटरप्राइज नेटवर्क, दूरसंचार, वायरलेस, ऑप्टिकल और रणनीतिक एवं रक्षा संचार जैसे क्षेत्रों के लिए विकसित किया गया है।

QKD क्या करता है?

क्वांटम कुंजी वितरण यानी QKD क्वांटम तकनीक का इस्तेमाल करके सुरक्षित क्रिप्टोग्राफिक कुंजी बनाने और वितरित करने की व्यवस्था है। इसका उद्देश्य संचार करने वाले पक्षों के बीच ऐसी सुरक्षा व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें संचार की निगरानी या छेड़छाड़ की कोशिश का पता लगाया जा सके।

सी-डॉट ने QKD आधारित क्यू-अक्षय सीडी और क्यू-अक्षय एमडी जैसे उत्पाद भी पेश किए हैं। इनके अलावा क्वांटम संचार प्रणालियों के लिए सिंगल-फोटॉन डिटेक्टर और अन्य महत्वपूर्ण मॉड्यूल भी विकसित किए गए हैं।

200 जीबीपीएस तक डेटा की सुरक्षा

सी-डॉट के क्वांटम पोर्टफोलियो में अलग-अलग जरूरतों के लिए कई एन्क्रिप्शन समाधान शामिल हैं। क्यू-अमोघ को 200 जीबीपीएस तक की डेटा ट्रांसमिशन क्षमता वाले उच्च क्षमता वाले ऑप्टिकल संचार लिंक को क्वांटम खतरों से सुरक्षित रखने के लिए डिजाइन किया गया है।

वहीं क्यू-महासेतु 40 जीबीपीएस तक की डेटा ट्रांसमिशन क्षमता वाले लेयर-2/3 नेटवर्क के लिए क्वांटम-सुरक्षित एन्क्रिप्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। क्यू-सेतु 80 एमबीपीएस तक की डेटा दर वाले लेयर-3 संचार को सुरक्षित करने के लिए बनाया गया है।

मोबाइल और इंटरनेट यूजर के लिए इसका क्या मतलब?

क्वांटम सुरक्षा का मुद्दा फिलहाल आम मोबाइल यूजर के सामने तत्काल दिखाई देने वाला खतरा नहीं है। लेकिन जैसे-जैसे क्वांटम कंप्यूटिंग विकसित होगी, बैंकिंग, सरकारी संचार, डिजिटल पहचान, क्लाउड और इंटरनेट पर सुरक्षित रखे गए डेटा की सुरक्षा के लिए मौजूदा क्रिप्टोग्राफी को अपग्रेड करना जरूरी होगा।

इसीलिए दुनिया भर में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और तकनीकी संस्थान पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी की ओर संक्रमण की तैयारी कर रहे हैं। भारत में सी-डॉट के ये स्वदेशी उत्पाद इसी लंबी अवधि की सुरक्षा तैयारी का हिस्सा हैं।

सरकार का कहना है कि इन उत्पादों के जरिए भारत अपने संचार बुनियादी ढांचे को उभरते क्वांटम युग के लिए अधिक सुरक्षित और भविष्य के खतरों के प्रति तैयार करना चाहता है।

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