ईवी की बैटरियां होंगी ज्यादा सस्ती और टिकाऊ

यह समाचार साझा करें

WhatsApp Facebook X

पढ़ने की सुविधा

अपनी सुविधा के अनुसार अक्षर और कंट्रास्ट चुनें।

अक्षर आकार

भारतीय वैज्ञानिकों ने विकसित की नई तकनीक

नई दिल्ली, 24 जुलाई 2026 (वाय के न्यूज)। इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को सस्ता और अधिक भरोसेमंद बनाने की दिशा में भारतीय वैज्ञानिकों ने नई बैटरी तकनीक विकसित की है। यह तकनीक भविष्य में ऐसी बैटरियां बनाने में मदद कर सकती है, जो मौजूदा बैटरियों की तुलना में अधिक सुरक्षित, कम लागत वाली और लंबे समय तक चलने वाली हों।

तमिलनाडु के सास्त्रा डीम्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने जिंक-एयर बैटरी के लिए नया नैनोफ्लुइड इलेक्ट्रोलाइट तैयार किया है। इलेक्ट्रोलाइट बैटरी के भीतर काम करने वाला वह तरल होता है, जो ऊर्जा के प्रवाह में अहम भूमिका निभाता है। नई तकनीक बैटरी में जिंक के क्षरण और अनावश्यक हाइड्रोजन गैस बनने की समस्या को कम करती है, जिससे बैटरी की क्षमता और उम्र दोनों बढ़ सकती हैं।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सहयोग से विकसित इस तकनीक को भारतीय पेटेंट (IN570691) मिल चुका है और वैज्ञानिकों के अनुसार यह व्यावसायिक उपयोग के लिए तैयार है।

शोध दल ने बैटरी के लिए कम लागत वाले नए उत्प्रेरक (कैटेलिस्ट) भी विकसित किए हैं। साथ ही, इस्तेमाल किए जा चुके वॉटर प्यूरीफायर के सक्रिय कार्बन और सर्जिकल फेस मास्क को पुनर्चक्रित कर बैटरी में उपयोग होने वाली सामग्री तैयार की गई है। इससे बैटरी निर्माण की लागत कम होने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तकनीक का उपयोग केवल इलेक्ट्रिक वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका इस्तेमाल सौर और पवन ऊर्जा जैसी अक्षय ऊर्जा के बड़े पैमाने पर भंडारण (ग्रिड-स्केल स्टोरेज) में भी किया जा सकेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक व्यावसायिक स्तर पर अपनाई जाती है, तो भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियां अधिक किफायती, सुरक्षित और टिकाऊ बन सकती हैं।

पाठकों की पसंद

सबसे अधिक पढ़े गए

पिछले 7 दिनों के आधार पर