कैंसर की ‘स्मार्ट’ दवा तैयार, IIT गुवाहाटी और IASST के शोध में नई उम्मीद

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नई दिल्ली, 20 अगस्त। वाय के न्यूज। कैंसर के इलाज में स्वस्थ कोशिकाओं को होने वाले नुकसान को कम करने की दिशा में भारतीय वैज्ञानिकों ने एक नई ‘स्मार्ट’ दवा विकसित की है। RK-251 नाम की इस दवा को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह मुख्य रूप से कैंसर कोशिकाओं के भीतर मौजूद रासायनिक वातावरण में सक्रिय हो। प्रीक्लिनिकल अध्ययनों में इसने विशेष रूप से आक्रामक ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ प्रभाव दिखाया है।

यह शोध विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (IASST) और IIT गुवाहाटी के वैज्ञानिकों के सहयोग से किया गया है। शोध का नेतृत्व IASST के डॉ. असीस बाला और IIT गुवाहाटी के डॉ. के.पी. भाबक ने किया।

कैंसर कोशिकाओं के अंदर ही सक्रिय होने की रणनीति

कैंसर उपचार की प्रमुख चुनौतियों में से एक यह है कि कई पारंपरिक उपचार कैंसर कोशिकाओं के साथ-साथ स्वस्थ कोशिकाओं को भी प्रभावित करते हैं। इसके कारण मरीजों को उपचार से जुड़े दुष्प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है। वैज्ञानिकों ने इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए ऐसी दवा विकसित करने की कोशिश की है, जो सामान्य ऊतकों में अपेक्षाकृत निष्क्रिय रहे और कैंसर कोशिकाओं के भीतर पहुंचने पर सक्रिय हो।

RK-251 की कार्यप्रणाली इसी सिद्धांत पर आधारित है। कैंसर कोशिकाएं अक्सर रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज (ROS) का अपेक्षाकृत अधिक स्तर पैदा करती हैं। दवा जब कैंसर कोशिका के भीतर पहुंचती है, तो यह उच्च ROS स्तर उसके सक्रिय होने की प्रक्रिया को शुरू करता है।

सक्रिय होने के बाद RK-251 से NBDHEX नामक शक्तिशाली कैंसर-रोधी यौगिक मुक्त होता है। यह ऐसे लक्षित प्रोटीनों को बाधित करता है, जिनका इस्तेमाल कई कैंसर कोशिकाएं जीवित रहने और उपचार के प्रति प्रतिरोध विकसित करने के लिए करती हैं।

ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर पर असर

प्रीक्लिनिकल परीक्षणों में RK-251 ने आक्रामक ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ मजबूत प्रभाव दिखाया। वहीं स्वस्थ कोशिकाओं पर इसका प्रभाव अपेक्षाकृत कम पाया गया। शोधकर्ताओं के अनुसार, यही चयनात्मकता इस दवा की संभावित उपयोगिता का महत्वपूर्ण पहलू है।

उम्मीदवार दवा के व्यवहार का अध्ययन जेब्राफिश भ्रूणों में भी किया गया। अध्ययन में स्पष्ट विषाक्तता के संकेत नहीं मिले। इसके अलावा ROS की मौजूदगी में दवा ने अपेक्षित फ्लोरेसेंस प्रदर्शित किया, जिससे इसकी सक्रियण प्रक्रिया की पुष्टि करने में मदद मिली।

अभी मरीजों पर इस्तेमाल से दूर

हालांकि वैज्ञानिक परिणाम उत्साहजनक हैं, RK-251 को अभी कैंसर मरीजों के उपचार के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवा नहीं माना जा सकता। शोध अभी प्रीक्लिनिकल चरण में है। मनुष्यों में इसकी सुरक्षा, प्रभावशीलता, उचित खुराक और संभावित दुष्प्रभावों का पता लगाने के लिए आगे व्यापक परीक्षण आवश्यक होंगे।

इसलिए फिलहाल यह कहना अधिक उचित होगा कि RK-251 भविष्य में कैंसर के अधिक लक्षित उपचार की दिशा में एक संभावित उम्मीदवार है। यह अभी पारंपरिक कीमोथेरेपी का स्थापित विकल्प नहीं है।

यह शोध ACS Journal of Medicinal Chemistry में प्रकाशित हुआ है।

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