स्काईरूट : अगले साल से हर महीने एक, फिर हर हफ्ते और फिर रोज कई लांच

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कंपनी ने प्रधानमंत्री को अपनी योजनाएं और लक्ष्य बताया

नई दिल्ली, 23 अगस्त। वाय के न्यूज। भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में अब रॉकेट लॉन्च की रफ्तार बढ़ाने की तैयारी है। भारत के पहले स्पेस टेक यूनिकॉर्न स्काईरूट ने अगले साल के मध्य तक हर महीने एक रॉकेट लॉन्च करने का लक्ष्य बताया है। कंपनी का दीर्घकालिक लक्ष्य इसे बढ़ाकर हर सप्ताह एक लॉन्च और आगे चलकर रोजाना कई लॉन्च तक ले जाना है।

स्काईरूट के CEO ने प्रधानमंत्री के साथ बातचीत में बताया कि कंपनी ने 18 जुलाई को भारत का पहला निजी रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च किया और उससे सैटेलाइट्स को कक्षा में स्थापित किया। उन्होंने कहा कि यह कंपनी के लिए अभी शुरुआत है।

तीन फैक्ट्रियां तैयार, महीने में एक रॉकेट की क्षमता

CEO के मुताबिक स्काईरूट की तीन फैक्ट्रियां बन चुकी हैं और कंपनी के पास फिलहाल हर महीने एक रॉकेट तैयार करने की क्षमता है। अगले साल के मध्य तक नियमित रूप से एक लॉन्च प्रति माह करने की योजना है।

कंपनी इसके बाद लॉन्च की गति को और बढ़ाना चाहती है। दीर्घकालीन लक्ष्य सप्ताह में एक लॉन्च और आगे चलकर एक दिन में कई लॉन्च करने का है।

पहले लॉन्च के बाद बढ़ा निवेशकों का भरोसा

प्रधानमंत्री ने बातचीत के दौरान पूछा कि सफल लॉन्च के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा है या नहीं। CEO ने कहा कि पहले लॉन्च के बाद स्काईरूट के प्रति निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।

CEO ने यह भी बताया कि सफल लॉन्च के बाद कंपनी को केवल एक महीने में आठ लॉन्च कॉन्ट्रैक्ट मिले हैं, जिनमें अधिकांश अंतरराष्ट्रीय हैं।

निजी अंतरिक्ष क्षेत्र खुलने को बताया अहम मोड़

बातचीत में प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की कोशिश रही है कि नीतिगत फैसलों में निरंतरता रहे, ताकि जोखिम लेने वाले उद्यमियों को यह भरोसा हो कि कठिन परिस्थिति में उनका साथ नहीं छोड़ा जाएगा।

स्पेस सेक्टर में निजी कंपनियों के प्रवेश के बाद भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर बनने की बात भी सामने आई। CEO ने कहा कि अमेरिका और यूरोप में काम कर रहे कई भारतीय अब भारत लौटकर स्पेस स्टार्टअप के साथ काम करना चाहते हैं।

प्रधानमंत्री ने भारत को दुनिया भर के स्पेस टैलेंट के लिए आकर्षण का केंद्र बनाने की जरूरत बताई।

लागत और प्रतिभा को भारत की ताकत बताया

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत लागत के मामले में प्रतिस्पर्धी है और देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। उनके मुताबिक जोखिम लेने की क्षमता के साथ ये दोनों ताकतें भारत को वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में तेजी से अपनी जगह बनाने में मदद कर सकती हैं।

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