नाग पंचमी के दिन मनाई जाती है चरक जयंती, चरक संहिता आयुर्वेद के प्रमुख शास्त्रीय ग्रंथों में शामिल
नई दिल्ली, 17 अगस्त। वाय के न्यूज। आयुर्वेद के महान आचार्य चरक की जयंती आज, 17 अगस्त को मनाई जा रही है। चरक जयंती श्रावण शुक्ल पंचमी को मनाए जाने की परंपरा है और इस वर्ष यह तिथि नाग पंचमी के साथ पड़ रही है। पंचांग के अनुसार 17 अगस्त को श्रावण शुक्ल पंचमी है।
आचार्य चरक का नाम भारतीय चिकित्सा परंपरा के सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथों में शामिल चरक संहिता से जुड़ा है। यह ग्रंथ आयुर्वेद के प्रमुख शास्त्रीय ग्रंथों में माना जाता है और विशेष रूप से कायचिकित्सा यानी आंतरिक चिकित्सा के सिद्धांतों और उपचार पद्धतियों के अध्ययन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
चरक संहिता केवल उपचार का ग्रंथ नहीं
चरक संहिता में रोगों और उनके उपचार के साथ-साथ स्वास्थ्य संरक्षण, आहार, जीवनशैली, औषधीय द्रव्यों, शरीर और रोग की अवधारणाओं तथा चिकित्सक के आचरण जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा मिलती है।
आयुर्वेद की परंपरा में इसे बृहत्त्रयी के प्रमुख ग्रंथों में गिना जाता है। आयुर्वेद के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए आज भी इसका अध्ययन महत्वपूर्ण है। केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) ने चरक संहिता के विभिन्न संस्करणों, आलोचनात्मक अध्ययन और टीकाओं के प्रकाशन पर काम किया है। परिषद के साहित्यिक अनुसंधान कार्यक्रम में चरक संहिता के अध्ययन और उसके विभिन्न पाठों पर शोध भी शामिल है।
चरक के विचारों पर आज भी शोध
चरक संहिता के महत्व का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सीसीआरएएस ने चरक संहिता पर आधारित शोध-पत्रों का संकलन ‘महर्षि चरक’ नाम से प्रकाशित किया है। इसमें चरक संहिता में वर्णित दोष सिद्धांत, ओज, दीर्घायु, रसायन और अन्य आयुर्वेदिक अवधारणाओं पर शोध शामिल हैं।
सीसीआरएएस ने वर्ष 2026 में भी ‘चरकसंहिता का अध्ययन’ नामक प्रकाशन को अपने वैद्यक नवोन्मेष ग्रंथमाला के तहत सूचीबद्ध किया है। यह बताता है कि चरक संहिता आज भी आयुर्वेद के अकादमिक और शोध क्षेत्र में प्रासंगिक बनी हुई है।
औषधीय पौधों के अध्ययन में भी चरक का योगदान
चरक संहिता में अनेक औषधीय वनस्पतियों और उनके उपयोग का वर्णन मिलता है। उदाहरण के लिए, आयुष मंत्रालय के गुडूची संबंधी दस्तावेज में चरक द्वारा गुडूची को आयुर्वेद में महत्वपूर्ण औषधीय द्रव्यों में शामिल किए जाने का उल्लेख है।
आयुर्वेद के शास्त्रीय ग्रंथों को डिजिटल रूप से उपलब्ध कराने के लिए भी भारत सरकार के आयुष मंत्रालय और सीसीआरएएस से जुड़े प्रयास जारी हैं। आयुर्वेद ग्रंथ समुच्चय पोर्टल पर चरक संहिता और सुश्रुत संहिता सहित अनेक शास्त्रीय ग्रंथ उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि विद्यार्थी, चिकित्सक, शिक्षक और शोधकर्ता उनका अध्ययन कर सकें।
जयंती का उद्देश्य परंपरा और अध्ययन को जोड़ना
चरक जयंती को केवल एक स्मरण दिवस के रूप में देखने के बजाय आयुर्वेद की शास्त्रीय परंपरा, उसके ग्रंथों और उनके व्यवस्थित अध्ययन की ओर ध्यान आकर्षित करने के अवसर के रूप में भी देखा जाता है। चरक संहिता में मौजूद चिकित्सा संबंधी अवधारणाओं को आधुनिक वैज्ञानिक कसौटियों पर समझने और उनका प्रमाण आधारित मूल्यांकन करने की आवश्यकता आज भी आयुर्वेद अनुसंधान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
चरक जयंती इसलिए केवल एक ऐतिहासिक आचार्य के स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि भारतीय चिकित्सा ज्ञान की उस शास्त्रीय परंपरा को समझने का दिन है, जिसका एक महत्वपूर्ण आधार चरक संहिता है।
