सूर्य के विस्फोट से पहले चेतावनी की दिशा में नई कामयाबी

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वैज्ञानिकों ने बनाया 3D कंप्यूटर मॉडल

चुंबकीय ऊर्जा के संचय और कोरोनल मास इजेक्शन की गति का संबंध समझने में मिले महत्वपूर्ण संकेत

नई दिल्ली, 13 अगस्त 2026। वाय के न्यूज। सूर्य से निकलने वाले शक्तिशाली कोरोनल मास इजेक्शन (CME) के पृथ्वी पर पहुंचने से पहले उनके संभावित प्रभावों का अनुमान लगाने की दिशा में भारतीय वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिकों की टीम ने एक त्रि-आयामी मैग्नेटोहाइड्रोडायनामिक (MHD) कंप्यूटर सिमुलेशन मॉडल विकसित किया है, जो CME के निर्माण और विस्फोट की प्रक्रिया में चुंबकीय ऊर्जा के संचय और उसके मुक्त होने को समझने में मदद कर सकता है।

यह अध्ययन भारतीय ताराभौतिकी संस्थान (IIA) के वैज्ञानिकों ने सहयोगी शोधकर्ताओं के साथ किया है। अध्ययन The Astrophysical Journal में प्रकाशित हुआ है।

CME कैसे बनता है?

CME सूर्य से अंतरिक्ष में निकलने वाले चुंबकीय प्लाज्मा के विशाल विस्फोट होते हैं। जब इनका रुख पृथ्वी की ओर होता है, तो ये उपग्रह प्रणालियों, विद्युत ग्रिड और संचार प्रणालियों को प्रभावित कर सकते हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार, इन विस्फोटों में मैग्नेटिक फ्लक्स रोप (MFR) महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह प्लाज्मा में चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं का मुड़ा हुआ समूह होता है। हालांकि CME के दौरान चुंबकीय ऊर्जा किस तरह जमा होती है और फिर अचानक मुक्त होती है, इसकी पूरी प्रक्रिया अब तक स्पष्ट नहीं थी।

कंप्यूटर मॉडल ने दिखाई पूरी प्रक्रिया

शोधकर्ताओं ने ऐसा 3D मॉडल तैयार किया, जो सूर्य के कोरोना की यथार्थपरक चुंबकीय संरचना से शुरुआत करता है। इसके बाद सूर्य की सतह के नीचे से नए चुंबकीय फ्लक्स के उभरने की प्रक्रिया का अनुकरण करते हुए एक मुड़ी हुई फ्लक्स रोप को धीरे-धीरे कोरोना में प्रविष्ट कराया गया।

सिमुलेशन में देखा गया कि जैसे-जैसे फ्लक्स रोप ऊपर उठती है, उसके आसपास का चुंबकीय क्षेत्र खिंचने और संकुचित होने लगता है। इसके बाद विपरीत दिशाओं वाले चुंबकीय क्षेत्र के बीच चुंबकीय पुनर्संयोजन (magnetic reconnection) की प्रक्रिया शुरू होती है।

इस दौरान एक पतली और अत्यधिक विद्युत धारा वाली परत बनती है। समय के साथ यह प्रक्रिया तेज होती जाती है और अंततः फ्लक्स रोप के तीव्र गति से अंतरिक्ष में बाहर निकलने के रूप में सामने आती है।

पुनर्संयोजन की दर और CME की गति में संबंध

अध्ययन का महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि चुंबकीय पुनर्संयोजन की दर और CME की गति के बीच स्पष्ट संबंध पाया गया। पुनर्संयोजन जितनी तेजी से हुआ, CME का विस्फोट भी उतनी ही तेजी से हुआ।

इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि CME केवल विस्फोट करेगा या नहीं, बल्कि उसके विस्फोट की गति और ऊर्जा कितनी हो सकती है।

सिमुलेशन का वास्तविक अवलोकनों से मिलान

शोधकर्ताओं ने मॉडल में लगातार दो फ्लक्स रोप विस्फोटों का सिमुलेशन किया और परिणामों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि भी की। फिनलैंड स्थित हेलसिंकी विश्वविद्यालय के शोधकर्ता ने NASA के Helioseismic and Magnetic Imager (HMI) तथा Atmospheric Imaging Assembly (AIA) से प्राप्त अवलोकन संबंधी आंकड़ों के आधार पर इस विश्लेषण में योगदान दिया।

अध्ययन में डॉ. समृद्धि शंकर मैती, डॉ. पियली चटर्जी, इजास एस. मिथीन और डॉ. रणदीप सरकार शामिल रहे।

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह अध्ययन सूर्य की धीरे-धीरे विकसित होने वाली चुंबकीय संरचना के एक शक्तिशाली CME में बदलने की प्रक्रिया को समझने में नई जानकारी देता है। इससे भविष्य में अंतरिक्ष मौसम (Space Weather) की बेहतर निगरानी और CME के संभावित प्रभावों के पूर्वानुमान की क्षमता विकसित करने में मदद मिल सकती है।

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