नई दिल्ली, 10 अगस्त। वाय के न्यूज। भारत ने गैर-जीवाश्म स्रोतों से बिजली उत्पादन की स्थापित क्षमता में 300 गीगावाट का आंकड़ा पार कर लिया है। गैर-जीवाश्म यानी कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भर नहीं रहने वाले ऊर्जा स्रोत। इनमें सौर, पवन, जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा जैसे स्रोत शामिल हैं।

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, यह उपलब्धि 31 जुलाई 2026 को हासिल हुई। इसके साथ ही भारत 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता के लक्ष्य का 60 प्रतिशत से अधिक हासिल कर चुका है।
देश की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता में गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी अब 54 प्रतिशत से अधिक हो गई है।
सौर ऊर्जा सबसे बड़ा योगदानकर्ता
इस क्षमता में बढ़ोतरी में सौर ऊर्जा सबसे आगे है। देश में सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता अब करीब 165 गीगावाट हो गई है, जबकि वर्ष 2014 में यह केवल 2.8 गीगावाट थी।
मंत्रालय के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में गैर-जीवाश्म बिजली उत्पादन क्षमता में रिकॉर्ड 55.29 गीगावाट की वृद्धि हुई। इसमें सौर ऊर्जा का योगदान 44.6 गीगावाट और पवन ऊर्जा का करीब 6 गीगावाट रहा।
गैर-जीवाश्म स्रोतों से बिजली उत्पादन भी बढ़ा
इन स्रोतों से बिजली उत्पादन भी तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2014-15 में करीब 191 अरब यूनिट बिजली गैर-जीवाश्म स्रोतों से पैदा हुई थी। यह आंकड़ा 2025-26 में बढ़कर 477 अरब यूनिट से अधिक हो गया।
सौर और पवन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा को आम तौर पर स्वच्छ या ग्रीन एनर्जी कहा जाता है। हालांकि, “गैर-जीवाश्म” श्रेणी इससे व्यापक है, क्योंकि इसमें परमाणु ऊर्जा जैसे स्रोत भी शामिल हैं।
मंत्रालय के अनुसार, गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता में यह वृद्धि अब केवल जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने तक सीमित नहीं है। यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा, आयात पर निर्भरता कम करने, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और आर्थिक मजबूती के लिए भी महत्वपूर्ण है।
