एआई से बदलेगा इलाज का तरीका, मेडटेक में भारत के लिए बड़ा अवसर

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नई दिल्ली, 9 अगस्त। वाय के न्यूज । स्वास्थ्य सेवा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच भारत अब एआई आधारित मेडिकल तकनीकों को बड़े पैमाने पर अपनाने की तैयारी कर रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने शनिवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में ‘एआई इन मेडटेक: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए हेल्थकेयर में क्रांति’ विषय पर नॉलेज पेपर जारी किया।

फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने फिक्की के सहयोग से आयोजित ‘इंडिया मेडिकल डिवाइस 2026’ के नौवें संस्करण में यह रिपोर्ट जारी की। फिक्की और Praxis Global Alliance के साथ तैयार रिपोर्ट में बताया गया है कि एआई डायग्नोस्टिक्स, क्लिनिकल निर्णय लेने में सहायता, अस्पतालों की कार्यक्षमता और मेडिकल डिवाइस के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM), IndiaAI मिशन, SAHI, BODH और राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति-2023 के जरिए एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जरूरी डिजिटल और नीतिगत आधार तैयार किया है। हालांकि चुनौती अब इन पहलों और सफल पायलट प्रोजेक्ट्स को नियमित क्लिनिकल इस्तेमाल तक पहुंचाने की है।

डेटा से लेकर भुगतान तक कई चुनौतियां

रिपोर्ट में स्वास्थ्य क्षेत्र के बिखरे हुए डेटा और एआई समाधानों के प्रभाव को साबित करने के लिए पर्याप्त क्लिनिकल साक्ष्यों की कमी को बड़ी चुनौती बताया गया है। इसके साथ ही ऐसे नियामकीय ढांचे की जरूरत बताई गई है, जो एआई तकनीक के पूरे जीवन-चक्र के दौरान उसके लगातार बदलते स्वरूप को ध्यान में रख सके।

एआई आधारित चिकित्सा उपकरणों के लिए खरीद और रीइंबर्समेंट (भुगतान वापसी) की प्रभावी व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा व्यवस्था में एआई से मिलने वाली अतिरिक्त चिकित्सकीय और आर्थिक उपयोगिता को पर्याप्त रूप से पहचानने की क्षमता सीमित है।

डायग्नोस्टिक्स में सबसे बड़ा असर

रिपोर्ट में एआई आधारित डायग्नोस्टिक्स को सबसे तेजी से बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाले क्षेत्रों में माना गया है। इससे प्राथमिक और द्वितीयक स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं में विशेषज्ञों की कमी को कुछ हद तक पूरा करने, डॉक्टरों की उत्पादकता बढ़ाने और दूरदराज के क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच बेहतर करने में मदद मिल सकती है।

भारत के लिए यह अवसर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उसके पास मजबूत सॉफ्टवेयर क्षमता, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, विविध मरीज आबादी और तेजी से बढ़ता मेडटेक विनिर्माण आधार मौजूद है। रिपोर्ट का आकलन है कि इन क्षमताओं को एक साथ इस्तेमाल कर भारत एआई आधारित चिकित्सा तकनीकों के जिम्मेदार विकास, निर्माण और उपयोग में वैश्विक भूमिका हासिल कर सकता है।

रिपोर्ट की पांच प्रमुख प्राथमिकताएं

1. मेडटेक को बड़ा एआई अवसर: मेडिकल डिवाइस में विशेषज्ञ ज्ञान को एआई के जरिए शामिल कर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता बढ़ाई जा सकती है।

2. मजबूत आधार, लेकिन स्केल की कमी: भारत में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और नवाचार का आधार तैयार है, लेकिन बिखरे डेटा, बदलते नियमन और सीमित रीइंबर्समेंट विकल्पों के कारण एआई का व्यापक इस्तेमाल अभी चुनौती बना हुआ है।

3. पायलट से नियमित इस्तेमाल तक: एआई समाधानों को छोटे सफल प्रयोगों से निकालकर नियमित क्लिनिकल उपयोग में लाने के लिए बेहतर डेटा, साक्ष्य, जीवन-चक्र आधारित नियमन और खरीद व्यवस्था जरूरी है।

4. डायग्नोस्टिक्स में तेजी: एआई आधारित डायग्नोस्टिक्स से प्राथमिक और द्वितीयक स्वास्थ्य सेवाओं में विशेषज्ञता की उपलब्धता और उत्पादकता बढ़ने की उम्मीद है।

5. सभी पक्षों की साझेदारी: सरकार, नियामक संस्थाओं, अस्पतालों, भुगतान करने वाली संस्थाओं, उद्योग और अकादमिक क्षेत्र के बीच समन्वय के बिना एआई आधारित मेडटेक का व्यापक विस्तार संभव नहीं होगा।

कार्यक्रम में फार्मास्यूटिकल्स विभाग के सचिव मनोज जोशी, नीति आयोग के सदस्य डॉ. एम. श्रीनिवास, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव एवं आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल सहित केंद्र सरकार, उद्योग और मेडटेक क्षेत्र के वरिष्ठ प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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