नई दिल्ली, 23 जुलाई। सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (MSE) को बिना किसी संपार्श्विक (कोलेटरल) सुरक्षा या तीसरे पक्ष की गारंटी के बैंक ऋण उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने क्रेडिट गारंटी योजना (CGS) को और मजबूत किया है। इस योजना के तहत 1 अप्रैल 2025 से गारंटी की अधिकतम सीमा 5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दी गई है।
लोकसभा में एक लिखित उत्तर में केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने बताया कि क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (CGTMSE) के माध्यम से संचालित यह योजना पहली पीढ़ी के उद्यमियों, महिला नेतृत्व वाले उद्यमों और पिछड़े जिलों में स्थापित सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को बिना गारंटी ऋण उपलब्ध कराने में मदद करती है।
सरकार ने योजना के तहत वार्षिक गारंटी शुल्क (AGF) में 50 प्रतिशत की कमी कर इसे घटाकर 0.37 प्रतिशत प्रति वर्ष कर दिया है। महिला नेतृत्व वाले उद्यमों सहित विशेष श्रेणी के MSE के लिए गारंटी कवरेज भी बढ़ाया गया है।
मंत्री ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 9 फरवरी 2026 के निर्देश के अनुसार, सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक 20 लाख रुपये तक के एमएसएमई ऋण पर संपार्श्विक सुरक्षा नहीं मांग सकते। वहीं, ऋण से वंचित जिलों में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए CGTMSE की ओर से गारंटी शुल्क में 10 प्रतिशत की छूट और 5 प्रतिशत अतिरिक्त गारंटी कवरेज भी दिया जा रहा है।
सरकार के अनुसार, योजना की नियमित समीक्षा राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की बैठकों में की जाती है। साथ ही, राज्यों, बैंकों, SIDBI, उद्योग संगठनों और अन्य संस्थाओं के सहयोग से देशभर में जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक सूक्ष्म एवं लघु उद्यम इस योजना का लाभ उठा सकें।
