आमों के किसानों को ₹15-20 प्रति किलो अधिक दाम मिलने की उम्मीद
नई दिल्ली, 23 जुलाई 2026 । उत्तर प्रदेश के दशहरी और लंगड़ा आम अब कम लागत में समुद्री रास्ते से भी विदेश भेजे जा सकेंगे। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के केंद्रीय उपोष्णकटिबंधीय बागवानी संस्थान (सीआईएसएच) और एपीडा की ओर से विकसित नई तकनीक के जरिए पहली बार अमरोहा से दुबई तक 12.5 टन आमों की व्यावसायिक खेप सफलतापूर्वक भेजी गई।
यह खेप 40 फीट के रेफ्रिजरेटेड कंटेनर से समुद्र के रास्ते दुबई पहुंची। 22 जून को तोड़े गए आम 17 जुलाई को, यानी 25 दिन बाद दुबई पहुंचे। लंबी यात्रा के बावजूद करीब 90 प्रतिशत आम अच्छी और बिक्री योग्य स्थिति में मिले।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह सफलता भारतीय आमों के निर्यात के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब महंगे हवाई परिवहन के बजाय सस्ते समुद्री मार्ग का अधिक उपयोग किया जा सकेगा।
इस तकनीक में तुड़ाई के बाद आमों का वैज्ञानिक तरीके से उपचार, ग्रेडिंग, पैकिंग और पूरी यात्रा के दौरान कोल्ड चेन बनाए रखी गई। इससे आमों की गुणवत्ता लंबे समय तक सुरक्षित रही।
पीआईबी के अनुसार, समुद्री मार्ग से माल ढुलाई का खर्च हवाई मार्ग की तुलना में काफी कम है। इससे निर्यातकों ने किसानों को आम के लिए करीब 15 से 20 रुपये प्रति किलोग्राम अधिक कीमत दी। इससे किसानों की आय बढ़ने की संभावना है।
यह खेप अमरोहा की शहनाज़ एक्सपोर्ट ने अत्ताशी ग्लोबल के सहयोग से संयुक्त अरब अमीरात की लुलु ग्रुप को भेजी। आईसीएआर-सीआईएसएच ने तकनीकी सहयोग और एपीडा ने निर्यात में सहायता दी।
क्या है इस सफलता का महत्व?
- उत्तर प्रदेश से समुद्री मार्ग से दशहरी और लंगड़ा आमों की पहली सफल व्यावसायिक खेप।
- 25 दिन की समुद्री यात्रा के बाद भी 90% आम अच्छी गुणवत्ता में पहुंचे।
- हवाई माल ढुलाई की तुलना में कम लागत पर निर्यात संभव।
- किसानों को लगभग ₹15-20 प्रति किलो अधिक कीमत मिलने की संभावना।
- खाड़ी देशों समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय आमों के निर्यात का नया रास्ता खुला।
