वॉशिंगटन/नई दिल्ली, 22 जुलाई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आयातित जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध टैरिफ लगाने की घोषणा की है। प्रस्तावित योजना के अनुसार 1 अगस्त 2026 से अगले दो वर्षों तक अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर कोई आयात शुल्क (0% टैरिफ) नहीं लगाया जाएगा। इसके बाद एक वर्ष के लिए 100% और फिर 200% टैरिफ लागू किया जाएगा। ट्रंप का कहना है कि दो वर्ष की यह राहत अवधि दवा कंपनियों को अमेरिका में विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने का अवसर देने के लिए है। यदि कंपनियां उत्पादन अमेरिका में स्थानांतरित नहीं करतीं, तो उन पर भारी आयात शुल्क लगाया जाएगा।
इस घोषणा ने भारतीय दवा उद्योग की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अमेरिका भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए सबसे बड़ा निर्यात बाजार है और भारत को दुनिया की “फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड” भी कहा जाता है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने अमेरिका को लगभग 9.7 अरब डॉलर मूल्य की दवाओं का निर्यात किया, जो उसके कुल फार्मा निर्यात का लगभग 38 प्रतिशत था।
ट्रंप के ऐलान के बाद शेयर बाजार में भी इसका असर देखने को मिला। अमेरिका पर अधिक निर्भर भारतीय दवा कंपनियों—सन फार्मा, सिप्ला, डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज़, ल्यूपिन और ऑरोबिंदो फार्मा—के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों को आशंका है कि यदि कंपनियां तय समय में अमेरिका में उत्पादन सुविधाएं स्थापित नहीं कर पाती हैं तो भविष्य में उनकी लागत और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दो वर्ष की मोहलत भारतीय कंपनियों को अपनी रणनीति बदलने और अमेरिका में निवेश बढ़ाने का अवसर देती है। हालांकि, यदि प्रस्तावित टैरिफ लागू होते हैं तो अमेरिका में जेनेरिक दवाओं की कीमतें बढ़ने और दवा आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर पड़ने की आशंका है।
समझिए ट्रंप का टैरिफ प्लान
- 1 अगस्त 2026 से 31 जुलाई 2028: 0% टैरिफ
- 1 अगस्त 2028 से 31 जुलाई 2029: 100% टैरिफ
- 1 अगस्त 2029 के बाद: 200% टैरिफ
स्रोत: Reuters, NDTV, The Economic Times, Anadolu Agency
