स्टाफ की कमी बताकर चाइल्ड केयर लीव से इनकार नहीं किया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

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महिला जेल वार्डन को 60 दिन अतिरिक्त अवकाश देने का निर्देश, कहा- प्रशासनिक कठिनाइयां वैधानिक अधिकार पर हावी नहीं हो सकतीं

बिलासपुर, 1 अगस्त 2026, वाय के न्यूज। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 2010 के तहत चाइल्ड केयर लीव (सीसीएल) का पात्र है, तो केवल स्टाफ की कमी या प्रशासनिक आवश्यकता का हवाला देकर उसे इस वैधानिक लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक असुविधा किसी कर्मचारी के कानूनी अधिकार पर हावी नहीं हो सकती।

न्यायमूर्ति बिभू दत्त गुरु की एकल पीठ ने बिलासपुर केंद्रीय जेल में पदस्थ महिला वार्डन की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता ने अपनी चाइल्ड केयर लीव बढ़ाने संबंधी आवेदन खारिज किए जाने को चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ता ने 10 सितंबर 2025 को जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था। उन्हें 13 अप्रैल से 11 जुलाई 2026 तक चाइल्ड केयर लीव स्वीकृत की गई थी। इसके बाद उन्होंने बच्चों की कम उम्र और उनकी देखभाल की आवश्यकता का हवाला देते हुए 60 दिन का अतिरिक्त अवकाश मांगा, लेकिन जेल प्रशासन ने महिला वार्डनों की कमी का कारण बताते हुए आवेदन अस्वीकार कर दिया।

स्टाफ की कमी को नहीं माना पर्याप्त आधार

राज्य सरकार ने अदालत में तर्क दिया कि केंद्रीय जेल में महिला वार्डनों की कमी है और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं को देखते हुए अवकाश बढ़ाना संभव नहीं था। अदालत के समक्ष प्रस्तुत रिकॉर्ड के अनुसार, महिला वार्डन के 106 स्वीकृत पदों में केवल 82 पद भरे हुए थे तथा बिलासपुर केंद्रीय जेल में मात्र 13 महिला वार्डन कार्यरत थीं।

हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि राज्य ने कहीं भी यह नहीं कहा कि याचिकाकर्ता चाइल्ड केयर लीव की पात्र नहीं थीं या उन्होंने नियमों के तहत निर्धारित अधिकतम 730 दिनों की सीमा पूरी कर ली थी। अदालत ने कहा कि अवकाश अस्वीकार करने का एकमात्र आधार स्टाफ की कमी था, जो कानूनन पर्याप्त नहीं माना जा सकता।

‘प्रशासनिक कठिनाइयां कर्मचारी के अधिकार नहीं छीन सकतीं’

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि चाइल्ड केयर लीव एक लाभकारी वैधानिक प्रावधान है, जिसका उद्देश्य छोटे बच्चों की देखभाल और उनके समुचित पालन-पोषण के लिए अभिभावक को आवश्यक समय उपलब्ध कराना है। इसलिए इस प्रावधान की व्याख्या उसके उद्देश्य को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए।

हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी विभाग में रिक्त पद हैं या कर्मचारियों की कमी है, तो उससे उत्पन्न प्रशासनिक चुनौतियों का समाधान करना नियोक्ता की जिम्मेदारी है। केवल इस आधार पर किसी पात्र कर्मचारी को कानून द्वारा प्रदत्त सेवा लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।

अस्वीकृति आदेश रद्द, 60 दिन की अतिरिक्त छुट्टी मंजूर

अदालत ने महिला वार्डन का आवेदन खारिज करने वाले आदेश को निरस्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को आवेदन की तिथि से 60 दिन की अतिरिक्त चाइल्ड केयर लीव स्वीकृत की जाए। साथ ही, बीच की अवधि की अनुपस्थिति को भी नियमानुसार चाइल्ड केयर लीव माना जाए।

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