नगर निगमों और जिला मुख्यालय वाली नगर पालिकाओं की समीक्षा; संपत्ति कर के ऑनलाइन भुगतान और अगले 50 साल की जल जरूरतों के लिए दीर्घकालिक योजना बनाने के निर्देश
रायपुर, 9 सितंबर, वाय के न्यूज।
उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव ने नगर निगम आयुक्तों और जिला मुख्यालय वाले नगर पालिकाओं के सीएमओ को हर सुबह शहर का दौरा कर साफ-सफाई और निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति देखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारी सिर्फ कार्यालय में बैठकर योजनाओं की समीक्षा न करें, बल्कि मैदानी स्थिति देखें और लोगों की समस्याओं पर तत्काल काम कराएं।
नवा रायपुर के विश्राम भवन में हुई समीक्षा बैठक में साव ने शहरों की स्वच्छता, राजस्व वसूली, निर्माण कार्यों, केंद्र और राज्य की योजनाओं तथा नागरिक सुविधाओं की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि नगरीय निकाय सिर्फ बजट खर्च करने वाली संस्थाएं नहीं हैं। उनकी जिम्मेदारी शहर की भविष्य की जरूरतों के मुताबिक योजनाएं बनाने और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं देने की है।

संपत्ति कर के लिए ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था
साव ने निकायों की आय बढ़ाने के लिए संपत्तियों का सर्वे कर नई संपत्तियों की पहचान करने के निर्देश दिए। उन्होंने ज्यादा से ज्यादा निकायों में संपत्ति कर जमा करने के लिए ऑनलाइन भुगतान की सुविधा विकसित करने को कहा।
निर्माण कार्यों में तेजी के साथ गुणवत्ता पर निगरानी रखने के निर्देश देते हुए उन्होंने अभियंताओं से निर्माणाधीन कार्यों का नियमित और कड़ाई से निरीक्षण करने को कहा। राजस्व वसूली, निर्माण, साफ-सफाई और योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के लिए सप्ताह के अलग-अलग दिनों में नियमित समीक्षा की कार्यपद्धति विकसित करने के निर्देश भी दिए।
अवैध कब्जे दिखें तो तत्काल कार्रवाई
उप मुख्यमंत्री ने अवैध कब्जों और अतिक्रमण पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अवैध निर्माण पर समय रहते कार्रवाई नहीं होने से भविष्य में सड़क, पानी, बिजली और दूसरी नागरिक सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
उन्होंने निगम आयुक्तों और सीएमओ को सुबह के भ्रमण के दौरान सफाई व्यवस्था, निर्माण कार्यों और शहर की समस्याओं को देखने के साथ नागरिकों से मिलने वाले फीडबैक पर भी ध्यान देने को कहा।
अगले 50 साल के पानी का हिसाब अभी से
साव ने नगरीय निकायों को अगले 50 वर्षों की जल जरूरतों को ध्यान में रखकर चिंतन शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और इस्तेमाल किए गए पानी के पुनः उपयोग की व्यापक योजना तैयार करने पर जोर दिया।
उन्होंने शहरों के सभी घरों तक पेयजल की पुख्ता व्यवस्था के लिए दीर्घकालिक रणनीति बनाने को कहा। निवेश और पर्यटन की संभावनाओं को देखते हुए शहरों की अधोसंरचना को भी भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने पर जोर दिया।
योजनाओं का असर जमीन पर दिखे : बोरा
नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने कहा कि निकायों की जिम्मेदारी केवल निर्माण कार्य और योजनाएं पूरी करना नहीं, बल्कि शहर की व्यवस्थाओं का सुचारू संचालन भी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं और विकास कार्यों का असर कागजों में नहीं, धरातल पर दिखाई देना चाहिए।
बोरा ने खाली शासकीय स्थानों की पहचान कर सघन वृक्षारोपण और अर्बन फॉरेस्ट विकसित करने, फुटपाथों को अतिक्रमणमुक्त रखने तथा एनजीटी के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा। सामान्य सभा और एमआईसी की बैठकें भी नियमित और समयबद्ध कराने के निर्देश दिए गए।
समीक्षा बैठक में निर्माणाधीन नालंदा परिसरों को जल्द शुरू करने के लिए फर्नीचर, आईटी सुविधाओं, पुस्तकों और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए टेंडर प्रक्रिया तेज करने पर भी चर्चा हुई।
बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम स्वनिधि, पीएम ई-बस, मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना, स्वच्छ भारत मिशन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, अमृत मिशन, जल आवर्धन योजनाओं, 15वें वित्त आयोग सहित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। राजस्व वसूली, वेतन भुगतान, ऊर्जा बिल ऑडिट, गो-धाम योजना, सीएम हेल्पलाइन, लोक सेवा गारंटी और रेन वाटर हार्वेस्टिंग की स्थिति भी देखी गई।
