वेस्टिन होटल की ₹110 करोड़ की अस्थायी कुर्की को चुनौती खारिज

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हाईकोर्ट ने ED की कार्रवाई में दखल से किया इनकार

बिलासपुर, 30 अगस्त । छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गोवा के वेस्टिन होटल की करीब ₹110 करोड़ की संपत्ति के अस्थायी कुर्की आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने शराब घोटाले या होटल को अपराध की आय से खरीदी गई संपत्ति होने के आरोप पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने 28 मई 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 5(1) के तहत जारी Provisional Attachment Order (PAO) को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की।

ED ने होटल खरीद को कथित अपराध की आय से जोड़ा

ED का आरोप है कि छत्तीसगढ़ के कथित शराब सिंडिकेट से हुई अपराध की आय का एक हिस्सा विजय कुमार अग्रवाल तक पहुंचाया गया और इस रकम का इस्तेमाल उनके भतीजे द्वारा गोवा में होटल खरीदने में किया गया।

जांच एजेंसी के अनुसार, एक आरोपी ने शराब घोटाले से हुई कथित कमाई में से कुल ₹110 करोड़ विजय अग्रवाल को दिए जाने की बात कही थी। ED ने इसी कथित कैश ट्रेल को होटल की खरीद से जोड़ा है।

₹60 करोड़ नकद भुगतान का भी उल्लेख

मामले की जांच के दौरान 2019 की तलाशी में याचिकाकर्ता से जुड़ी कंपनियों द्वारा सर बायोटेक इंडिया लिमिटेड को ₹60 करोड़ के कथित बेहिसाबी नकद भुगतान से संबंधित सामग्री मिलने की बात ED ने कही।

याचिकाकर्ता पक्ष ने इस नकदी के स्रोत को वैध कारोबारी आय बताया और आयकर कार्यवाही का हवाला दिया।

आयकर की कार्यवाही से PMLA जांच पर रोक नहीं

याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि आयकर अधिकारियों ने नकदी के स्रोत को स्वीकार किया है, इसलिए ED उसी रकम को अपराध से अर्जित आय मानकर कार्रवाई नहीं कर सकती।

हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने माना कि आयकर कानून और PMLA अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाएं हैं। किसी रकम को आयकर कार्यवाही में स्वीकार किया जाना अपने आप उस रकम को PMLA के तहत जांच से बाहर नहीं करता।

हाईकोर्ट ने कहा : रिट में मिनी ट्रायल नहीं

अदालत ने कहा कि Article 226 के तहत रिट क्षेत्राधिकार में वह उपलब्ध सामग्री की अंतिम सत्यता तय करने के लिए मिनी ट्रायल नहीं कर सकती

कोर्ट इस स्तर पर केवल यह देख सकती है कि अधिकृत अधिकारी के पास अस्थायी कुर्की का आदेश जारी करने के लिए संबंधित सामग्री मौजूद थी या नहीं। मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप अंततः साबित होते हैं या नहीं, इसका निर्धारण संबंधित वैधानिक प्रक्रिया में साक्ष्यों की जांच के बाद होगा।

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