वन्यजीव शिकार-तस्करी का जाल: छत्तीसगढ़-ओडिशा बना हॉट स्पॉट

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कोरापुट में तेंदुए की खाल, बालासोर में पांच ओरांगुटान, छत्तीसगढ़ में बाघ और पैंगोलिन के मामले; देशभर में डीआरआई की छह बड़ी कार्रवाई

रायपुर, 10 सितंबर। वाय के न्यूज़।

वन्यजीवों के अवैध शिकार और तस्करी के हालिया मामलों ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा से जुड़े जंगलों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ओडिशा के कोरापुट में तेंदुए की खाल की बरामदगी से लेकर बालासोर के जंगल में पांच छोटे ओरांगुटान मिलने और छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा से जुड़े पैंगोलिन तस्करी के मामले तक, हाल की घटनाओं में वन्यजीव अपराध की अंतरराज्यीय कड़ियां सामने आई हैं।

कोरापुट में तेंदुए की खाल जब्त

7 सितंबर को राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने ओडिशा के कोरापुट जिले के जयपुर में एक व्यक्ति के कब्जे से तेंदुए की एक खाल जब्त की। खाल को आगे की कार्रवाई के लिए कोरापुट वन विभाग को सौंपा गया। यह इलाका छत्तीसगढ़ की सीमा से जुड़ा होने के कारण कार्रवाई का स्थानीय महत्व भी है।

बालासोर के जंगल में पांच ओरांगुटान ने बढ़ाया रहस्य

8 सितंबर को ओडिशा के बालासोर जिले के भोगराई क्षेत्र में पांच छोटे ओरांगुटान मिले। ये दो मादा और तीन नर बताए गए हैं। ओरांगुटान भारत के प्राकृतिक वन्यजीव नहीं हैं और मुख्य रूप से बोर्नियो तथा सुमात्रा में पाए जाते हैं।

इनके भारत और फिर बालासोर तक पहुंचने की जांच ओडिशा पुलिस की एसटीएफ और वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) कर रहे हैं। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इन्हें किस रास्ते से लाया गया और क्या इसके पीछे संगठित वन्यजीव तस्करी का नेटवर्क है। अभी तस्करी की आशंका की जांच चल रही है, इसे साबित तथ्य नहीं माना गया है।

छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर पैंगोलिन की तस्करी

अगस्त में ओडिशा के नुआपाड़ा जिले में एक सरकारी सिंचाई पंप कक्ष से करीब सात किलो वजन का जीवित पैंगोलिन बरामद हुआ था। कार्रवाई छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की एंटी-पोचिंग टीम और ओडिशा वन विभाग ने संयुक्त रूप से की थी। मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले का एक व्यक्ति भी शामिल था।

जांच की कड़ियां गरियाबंद के देवभोग क्षेत्र तक पहुंची थीं। इससे पता चलता है कि पैंगोलिन जैसे वन्यजीवों की तस्करी में राज्य की सीमाएं अपराधियों के लिए बड़ी बाधा नहीं हैं।

इंद्रावती में बाघों के शिकार की गंभीर कड़ी

छत्तीसगढ़ में इंद्रावती टाइगर रिजर्व और आसपास के इलाकों में बाघों के शिकार और उनकी खाल की बरामदगी के मामले भी सामने आए हैं। जून में कांकेर जिले में दो बाघों की खाल बरामद होने के बाद सात और लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। विधानसभा में सरकार ने 2024 से 2026 के बीच बाघ के अवैध शिकार-तस्करी के पांच मामलों में छह खालें जब्त किए जाने और 41 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी थी।

इन मामलों की जांच में छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा की कड़ी भी सामने आई है। इंद्रावती क्षेत्र में बाघों के शिकार की घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई है।

देशभर में डीआरआई की छह कार्रवाई

इसी बीच डीआरआई ने पिछले दस दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ छह बड़ी कार्रवाइयों में दो तेंदुए की खाल, 180 जीवित इंडियन स्टार कछुए, 12 जीवित टोके गेको, करीब 24 किलो पैंगोलिन शल्क और लगभग 500 ग्राम बाघ की हड्डियां जब्त की हैं। इन कार्रवाइयों में 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

डीआरआई की कार्रवाइयां ओडिशा, कर्नाटक, मेघालय, मध्य प्रदेश और असम तक फैली रहीं। एजेंसी ने वन विभाग, WCCB और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर कार्रवाई की।

सीमा से बड़ा है वन्यजीव अपराध का नेटवर्क

कोरापुट, बालासोर और नुआपाड़ा से लेकर छत्तीसगढ़ के बस्तर और दूसरे वन क्षेत्रों तक सामने आए मामले यह संकेत देते हैं कि वन्यजीव अपराध को केवल किसी एक जंगल या जिले की समस्या मानकर नहीं देखा जा सकता। बाघ, तेंदुआ और पैंगोलिन जैसे वन्यजीवों के साथ-साथ विदेशी प्रजातियों की अवैध आवाजाही की आशंका भी जांच एजेंसियों के सामने नई चुनौती है।

हालांकि अलग-अलग मामलों के बीच कोई एक साझा गिरोह या नेटवर्क अभी साबित नहीं हुआ है। जांच एजेंसियां इन मामलों में वन्यजीवों के स्रोत, परिवहन के रास्ते, खरीदारों और पूरे नेटवर्क की कड़ियां तलाश रही हैं।

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