सुकमा की 9 महिलाओं ने स्वेच्छा से पहने थे कोसा-कॉटन के परिधान, 160 पुनर्वासित हितग्राहियों को मिलेगा निःशुल्क हाथकरघा प्रशिक्षण
रायपुर, 17 अगस्त। वाय के न्यूज। राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस के अवसर पर रायपुर में आयोजित स्वदेशी फैशन शो में सुकमा की पुनर्वासित महिलाओं की भागीदारी को लेकर उठे सवालों के बीच ग्रामोद्योग विभाग ने स्पष्टीकरण जारी किया है। विभाग ने कहा है कि सुकमा के पुनर्वास केंद्रों में रह रही 9 महिलाओं ने फैशन शो में शामिल होने के लिए अपनी लिखित सहमति दी थी और उनकी भागीदारी पूरी तरह स्वैच्छिक थी।
7 अगस्त को रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित स्वदेशी फैशन शो में इन महिलाओं ने बिलासा हैंडलूम एम्पोरियम के कोसा और कॉटन परिधान पहनकर रैंप वॉक किया था। कार्यक्रम का आयोजन राज्य के हाथकरघा और ग्रामोद्योग उत्पादों को बढ़ावा देने तथा बुनकरों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से किया गया था।
विभाग ने कहा- बिना दबाव के लिया हिस्सा
ग्रामोद्योग विभाग के अनुसार सुकमा जिला प्रशासन ने 19 जुलाई 2026 को इन महिलाओं की कार्यक्रम में सहभागिता की जानकारी दी थी। इसके बाद चयनित सभी 9 महिलाओं से लिखित सहमति ली गई। विभाग का कहना है कि महिलाओं ने बिना किसी दबाव के अपनी इच्छा से फैशन शो में हिस्सा लिया।
विभाग के अनुसार इस पहल का उद्देश्य पुनर्वासित महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना था।
160 हितग्राहियों को मिलेगा हाथकरघा प्रशिक्षण
विभाग ने पुनर्वासित हितग्राहियों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए बस्तर संभाग के 8 पुनर्वास केंद्रों के 160 हितग्राहियों को हाथकरघा वस्त्र बुनाई का प्रशिक्षण देने की जानकारी भी दी है। प्रत्येक केंद्र से 20 हितग्राहियों का चयन किया जाएगा। इसके लिए 54.40 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
प्रशिक्षणार्थियों को निःशुल्क नए करघे और आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। विभाग का उद्देश्य प्रशिक्षण के बाद हितग्राहियों को घर से ही हाथकरघा कार्य के जरिए रोजगार और आय का अवसर उपलब्ध कराना है।
ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह प्रबंध संचालक राजेश सिंह राणा ने कहा कि पुनर्वासित हितग्राहियों को स्वरोजगार से जोड़ना उनके स्थायी पुनर्वास और सशक्तिकरण के लिए आवश्यक है।
स्वदेशी फैशन शो का उद्देश्य
राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस पर आयोजित फैशन शो और ग्रामोद्योग हाथकरघा प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के हाथकरघा उत्पादों और बुनकरों के काम को प्रदर्शित किया गया था। इसी आयोजन में पुनर्वासित महिलाओं ने कोसा और कॉटन से बने परिधान पहनकर रैंप वॉक किया था। विभाग का कहना है कि महिलाओं की इस भागीदारी को उनके आत्मविश्वास और सामाजिक पुनर्स्थापन से जोड़कर देखा गया।
