रायपुर पेपर लीक: प्रोफेसर समेत छह गिरफ्तार, दुर्ग से लीक होने का दावा

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रायपुर, 22 अगस्त। वाय के न्यूज। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) की बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में रायपुर पुलिस ने प्रोफेसर समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की जांच में प्रश्नपत्र के लीक होने का सिरा दुर्ग स्थित एक निजी कृषि कॉलेज तक पहुंचने की बात सामने आई है।

ताजा रिपोर्टों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में भारती एग्रीकल्चर कॉलेज, दुर्ग के प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया के अलावा अजय नायक, त्रिदेव पटेल, नितिन पाण्डेय, अनुज मिंज और आदित्य साहू शामिल हैं। इन नामों और आरोपों का विवरण फिलहाल पुलिस कार्रवाई की रिपोर्टिंग के आधार पर सामने आया है।

लिफाफे में छेद कर प्रश्नपत्र की रिकॉर्डिंग का आरोप

पुलिस जांच के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, योगेश सोनकेसरिया ने विश्वविद्यालय से प्राप्त प्रश्नपत्र के लिफाफे में सुई से छेद कर मोबाइल कैमरे से प्रश्नपत्र की वीडियो रिकॉर्डिंग की। इसके बाद प्रश्नपत्र की सामग्री अपने कॉलेज के छात्रों तक पहुंचाने और कथित रूप से 11 हजार रुपये में बेचने की बात सामने आई है। इसके बाद पेपर सोशल मीडिया के माध्यम से दूसरे छात्रों तक पहुंचा।

पुलिस ने आरोपियों से 11 हजार रुपये नकद, छह मोबाइल फोन, वीडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस, केबल, सुई और फेविकोल बरामद किए जाने की जानकारी दी है। मामले में दो अन्य आरोपियों के फरार होने और उनकी तलाश जारी रहने की भी रिपोर्ट है।

36 घंटे में कार्रवाई

रिपोर्टों के मुताबिक एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और तेलीबांधा पुलिस की टीम ने तकनीकी जांच के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ीं। मोबाइल फोन और WhatsApp से संबंधित डिजिटल साक्ष्य जांच में महत्वपूर्ण बताए जा रहे हैं। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार पुलिस की कार्रवाई में छह आरोपियों को पकड़ा गया है और पेपर के दुर्ग से लीक होने की बात सामने आई है।

परीक्षा से करीब दो घंटे पहले फैला था पेपर

IGKV की बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी परीक्षा 20 अगस्त को होनी थी। छात्रों के अनुसार परीक्षा शुरू होने से करीब दो घंटे पहले प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर प्रसारित हो गया था। शिकायत सामने आने के बाद विश्वविद्यालय ने परीक्षा निरस्त कर दी थी।

विश्वविद्यालय ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति भी गठित की है। निरस्त परीक्षा को सितंबर के पहले सप्ताह में दोबारा कराने की जानकारी सामने आई है।

छात्रों की भूमिका भी जांच में

प्रश्नपत्र छात्रों तक पहुंचने के बाद WhatsApp और सोशल मीडिया के जरिए आगे प्रसारित होने की बात सामने आई है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि लीक प्रश्नपत्र सबसे पहले किन छात्रों तक पहुंचा और उसे आगे किस-किस ने प्रसारित किया।

इस मामले में छात्रों से पूछताछ की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि पूछताछ किए गए प्रत्येक छात्र को आरोपी मानना उचित नहीं होगा। उनकी भूमिका का निर्धारण जांच और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर होगा।

जांच अभी जारी

पुलिस की कार्रवाई से प्रश्नपत्र के विश्वविद्यालय से बाहर निकलने और उसके बाद छात्रों तक पहुंचने की एक संभावित कड़ी सामने आई है। हालांकि पूरे नेटवर्क में प्रत्येक आरोपी की भूमिका, प्रश्नपत्र के प्रसार की पूरी श्रृंखला और संभावित आर्थिक लेन-देन की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ तथा मोबाइल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी है। पुलिस फरार बताए जा रहे आरोपियों की तलाश भी कर रही है।

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