एक नहीं, दो पेपर लीक; विश्वविद्यालय का प्रोटोकॉल भी पुलिस के रडार पर

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20 अगस्त के मामले की जांच में 7 अगस्त का पेपर भी लीक होने का दावा, सीलबंद प्रश्नपत्र की कस्टडी और आवाजाही की व्यवस्था की जांच

रायपुर, 22 अगस्त। वाय के न्यूज।इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) के पेपर लीक मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ एक के बजाय दो प्रश्नपत्रों के लीक होने की कड़ी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक 20 अगस्त को बीएससी द्वितीय वर्ष के एंटोमोलॉजी (कीटशास्त्र) के प्रश्नपत्र के लीक होने की जांच के दौरान पता चला कि 7 अगस्त को बीएससी प्रथम वर्ष का पैथोलॉजी प्रश्नपत्र भी लीक किया गया था।

पुलिस के अनुसार दोनों मामलों की कड़ी भारती एग्रीकल्चर कॉलेज, दुर्ग के प्रोफेसर योगेश से जुड़ती है। 7 अगस्त वाले मामले में प्रश्नपत्र सीमित संख्या में छात्रों तक पहुंचने का दावा है। पुलिस का कहना है कि 20 अगस्त के मामले में प्रश्नपत्र ज्यादा लोगों तक पहुंचा और इसी से जांच को पिछली घटना तक पहुंचने में मदद मिली।

सीलबंद लिफाफे में छेद कर कैमरे से प्रश्नपत्र देखने का दावा

पुलिस के मुताबिक प्रोफेसर की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय से सीलबंद प्रश्नपत्र लेकर संबंधित कॉलेज तक पहुंचाने की थी। पुलिस का दावा है कि उसने सीलबंद लिफाफा खोलने के बजाय उसमें छोटा छेद किया और एंडोस्कोपी कैमरे के जरिए अंदर रखे प्रश्नपत्र की तस्वीरें/रिकॉर्डिंग तैयार की।

पुलिस के अनुसार कैमरा मोबाइल से जुड़ा था। प्रश्नपत्र की सामग्री हासिल करने के बाद उसे हाथ से कॉपी किया गया और कथित तौर पर छात्रों तक पहुंचाया गया।

पुलिस की जांच में यह भी सामने आने का दावा है कि 7 अगस्त वाले प्रश्नपत्र के लिए करीब 12 हजार रुपये और 20 अगस्त वाले प्रश्नपत्र के लिए करीब 11 हजार रुपये लिए गए थे।

एक पेपर की जांच में सामने आया दूसरा मामला

20 अगस्त के पेपर लीक की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने छात्रों से पूछताछ और उनके संपर्कों की पड़ताल शुरू की। इसके लिए रायपुर के अलावा दुर्ग, बिलासपुर, कवर्धा, रायगढ़ सहित अन्य स्थानों पर टीमें भेजी गईं।

इसी जांच के दौरान पुलिस के मुताबिक 7 अगस्त को हुए पेपर लीक की जानकारी सामने आई। यानी 20 अगस्त की घटना को पुलिस अब एक अलग-थलग घटना के बजाय पहले हुए एक और पेपर लीक से जुड़ी कड़ी के रूप में देख रही है।

अब विश्वविद्यालय का प्रोटोकॉल भी जांच के घेरे में

मामले का एक अहम पहलू अब प्रश्नपत्रों की सुरक्षा व्यवस्था बन गया है। पुलिस यह जांच कर रही है कि विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों तक सीलबंद प्रश्नपत्र पहुंचाने का निर्धारित प्रोटोकॉल क्या है।

डीसीपी क्राइम के मुताबिक यह भी देखा जा रहा है कि प्रश्नपत्र ले जाने की जिम्मेदारी क्या केवल एक व्यक्ति को दी जाती है या इसके लिए कोई अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था है। साथ ही यह जांच की जा रही है कि प्रश्नपत्र की कस्टडी और उसे विश्वविद्यालय से कॉलेज तक पहुंचाने की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन हुआ था या नहीं।

पुलिस का कहना है कि यदि जांच में किसी सुरक्षा प्रोटोकॉल के उल्लंघन की बात सामने आती है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई की जाएगी।

यही वजह है कि अब जांच का सवाल केवल “पेपर किसने लीक किया?” तक सीमित नहीं है। इसके साथ यह भी देखा जा रहा है कि सीलबंद प्रश्नपत्र आरोपी तक किस प्रक्रिया से पहुंचा और उसकी सुरक्षा के लिए विश्वविद्यालय की व्यवस्था में कितनी परतें थीं।

जांच अभी जारी

पुलिस ने इस मामले में प्रोफेसर समेत छह लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी है। हालांकि पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और दो पेपर लीक की कड़ियां सामने आने के बाद अन्य संभावित मामलों तथा इसमें शामिल दूसरे लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।

नोट: प्रश्नपत्र की रिकॉर्डिंग, उसकी बिक्री, रकम और आरोपी की भूमिका से जुड़े विवरण पुलिस की जांच और पूछताछ में सामने आए दावों पर आधारित हैं। इनका न्यायिक परीक्षण अभी बाकी है।

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