रायपुर पेपर लीक: कल उच्चस्तरीय बैठक संभावित, परीक्षा सुरक्षा के साथ पुराने भर्ती विवाद पर भी उठ सकते हैं सवाल

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दो प्रश्नपत्र लीक होने के बाद प्रश्नपत्र की चेन ऑफ कस्टडी की समीक्षा संभव; सहायक प्राध्यापक भर्ती की वायरल सूची का पुराना मामला भी जांच के दायरे में लाने की मांग

रायपुर, 23 अगस्त। वाय के न्यूज। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में दो प्रश्नपत्र लीक होने के बाद विश्वविद्यालय में सोमवार को उच्चस्तरीय बैठक संभावित है। बैठक में प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की पूरी व्यवस्था की समीक्षा के साथ यह भी चर्चा हो सकती है कि पूर्व में भर्ती प्रक्रिया की गोपनीयता को लेकर उठे सवालों पर क्या कार्रवाई हुई थी।

20 अगस्त के एंटोमोलॉजी प्रश्नपत्र लीक मामले में पुलिस ने दुर्ग के निजी कृषि महाविद्यालय के एक प्रोफेसर समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक सीलबंद लिफाफे में बारीक छेद कर एंडोस्कोपिक कैमरे से प्रश्नपत्र की तस्वीर हासिल की गई और उसे छात्रों तक पहुंचाया गया।

इससे पहले 7 अगस्त के प्लांट पैथोलॉजी प्रश्नपत्र के लीक होने की बात भी पुलिस जांच के संदर्भ में सामने आई है। दो अलग-अलग परीक्षाओं में प्रश्नपत्र बाहर पहुंचने के बाद अब सवाल केवल आरोपियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विश्वविद्यालय की प्रश्नपत्र सुरक्षा व्यवस्था पर भी हैं।

प्रश्नपत्र की पूरी चेन ऑफ कस्टडी होगी अहम

बैठक में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह हो सकता है कि प्रश्नपत्र तैयार होने के बाद उसकी जिम्मेदारी किस-किस स्तर पर रही।

प्रश्नपत्र किसने तैयार किया, किसने पैक और सील किया, किसे सौंपा गया, कहां सुरक्षित रखा गया, किस माध्यम से संबद्ध कॉलेजों तक पहुंचाया गया और परीक्षा शुरू होने से पहले उसकी निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी—इन सभी चरणों का रिकॉर्ड सामने रखकर समीक्षा की जरूरत होगी।

20 अगस्त के मामले में पुलिस की जांच के अनुसार आरोपी प्रोफेसर ने सीलबंद लिफाफे को खोले बिना कैमरे से प्रश्नपत्र की तस्वीर हासिल की। इससे केवल सील की सुरक्षा पर निर्भर व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़ा होता है।

दोनों मामलों की टाइमलाइन का मिलान जरूरी

7 और 20 अगस्त के मामलों को अलग-अलग देखने के बजाय विश्वविद्यालय के सामने दोनों की समानांतर टाइमलाइन रखने की जरूरत है।

किस तारीख को कौन-सा प्रश्नपत्र किस प्रक्रिया से संबंधित कॉलेज या व्यक्ति तक पहुंचा, उसकी प्राप्ति का रिकॉर्ड क्या था और दोनों मामलों में कोई समान व्यक्ति, संस्था या प्रक्रिया सामने आती है या नहीं—यह मिलान जांच की दिशा बदल सकता है।

पुराने भर्ती मामले की भी चर्चा संभव

इसी बीच विश्वविद्यालय की पूर्व सहायक प्राध्यापक भर्ती को लेकर सामने आए एक पुराने विवाद की चर्चा भी फिर शुरू हो गई है। सितंबर 2024 में एक मीडिया रिपोर्ट/वीडियो में 20 से 30 लाख रुपये के कथित लेनदेन और सहायक प्राध्यापक भर्ती की एक वायरल सूची का दावा किया गया था।

वीडियो में दावा किया गया था कि भर्ती प्रक्रिया में 32 पदों के लिए इंटरव्यू हुए और बाद में 29 लोगों की ज्वॉइनिंग हुई। साथ ही 20 नामों वाली एक सूची वायरल होने तथा उसमें शामिल लोगों के बाद में चयनित होने का आरोप लगाया गया था।

हालांकि इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।

सूत्रों का कहना है कि उस समय विश्वविद्यालय की ओर से वायरल सूची को लेकर पुलिस में शिकायत भी की गई थी, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं हुई। इस दावे की पुष्टि के लिए शिकायत की प्रति, पुलिस डायरी/प्राप्ति क्रमांक और विश्वविद्यालय का पत्राचार सामने आना जरूरी है।

पुराने मामले में सबसे बड़ा सवाल—वायरल सूची और अंतिम चयन में कितनी समानता?

यदि विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में उस समय की वायरल सूची उपलब्ध है तो उसे अंतिम चयन सूची और ज्वॉइनिंग रिकॉर्ड से मिलाना अहम होगा।

सवाल यह होगा कि वायरल सूची में शामिल कितने नाम बाद में वास्तविक चयन सूची में आए। यदि यह संख्या दस्तावेजों से प्रमाणित होती है तो यह केवल सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक सूची का मामला नहीं रहेगा, बल्कि भर्ती प्रक्रिया की गोपनीयता की गंभीर जांच का आधार बनेगा।

इसी तरह पुलिस शिकायत का रिकॉर्ड मिल जाने पर यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि विश्वविद्यालय ने उस समय किस आधार पर पुलिस से जांच की मांग की थी और पुलिस ने एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की।

बैठक में उठ सकते हैं ये सवाल

  • प्रश्नपत्रों की चेन ऑफ कस्टडी कहां से शुरू और कहां खत्म होती है?
  • प्रश्नपत्र किस अधिकारी या कर्मचारी को सौंपा जाता है?
  • संबद्ध कॉलेजों के प्रतिनिधियों को प्रश्नपत्र लेने की मौजूदा व्यवस्था क्या है?
  • सीलबंद पैकेट की सुरक्षा के लिए सील के अलावा कौन-सी निगरानी व्यवस्था है?
  • प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले किसी व्यक्ति के निजी परिसर तक पहुंच सकता है या नहीं?
  • 7 और 20 अगस्त के मामलों में कोई साझा कड़ी है?
  • प्रश्नपत्र की डिजिटल फाइल और प्रिंटिंग प्रक्रिया कितनी सुरक्षित है?
  • पेपर लीक की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई का मानक प्रोटोकॉल क्या है?
  • पुराने भर्ती प्रकरण में वायरल सूची की वास्तविकता की कभी जांच हुई थी या नहीं?
  • यदि पुलिस शिकायत हुई थी तो उसका डायरी नंबर क्या था और उस पर क्या कार्रवाई हुई?
  • वायरल सूची और अंतिम चयन सूची में कितने नाम समान थे?
  • क्या परीक्षा और भर्ती दोनों प्रक्रियाओं के लिए स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट कराया जाएगा?

मौजूदा पेपर लीक प्रकरण में पुलिस की कार्रवाई आगे बढ़ चुकी है। अब विश्वविद्यालय के सामने अगली चुनौती केवल दोषियों की पहचान नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की पहचान और सुधार है, जिसने प्रश्नपत्र को परीक्षा से पहले बाहर निकलने का रास्ता दिया।

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