नई दिल्ली, 31 अगस्त 2026। आपके मोबाइल का कैमरा, कार का इंजन कंट्रोल सिस्टम, एटीएम, 5जी नेटवर्क या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस—इन सबके पीछे एक छोटी-सी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण चीज होती है, सेमीकंडक्टर चिप। आधुनिक अर्थव्यवस्था में इसकी अहमियत इतनी बढ़ गई है कि चिप की आपूर्ति अब केवल कारोबार का विषय नहीं, बल्कि रणनीतिक जरूरत भी बन चुकी है।
भारत ने इसी दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने सोमवार को सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के दूसरे चरण की योजना अधिसूचित कर दी। इसके लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। सरकार का लक्ष्य भारत को केवल चिप असेंबल करने वाला देश नहीं, बल्कि वेफर से लेकर चिप डिजाइन और विनिर्माण तक पूरी वैल्यू चेन का महत्वपूर्ण केंद्र बनाना है।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली में योजना के दूसरे चरण के सभी छह स्तंभों की अधिसूचना जारी की। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में अपनी हिस्सेदारी करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है।
आखिर चिप इतनी महत्वपूर्ण क्यों?
सेमीकंडक्टर को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स का ‘दिमाग’ कहा जा सकता है। यह इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में बिजली के प्रवाह को नियंत्रित करता है और डेटा को प्रोसेस करने में मदद करता है।
आज स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रिक वाहन, कंप्यूटर, चिकित्सा उपकरण, उपग्रह, रक्षा प्रणालियां और AI सर्वर तक—लगभग हर आधुनिक तकनीक चिप पर निर्भर है।
इसीलिए दुनिया में जब कभी चिप की आपूर्ति बाधित होती है, तो उसका असर मोबाइल और कार से लेकर औद्योगिक उत्पादन तक दिखाई देता है। भारत अब इस रणनीतिक क्षेत्र में अपनी निर्भरता कम करने और वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
लक्ष्य सिर्फ फैक्ट्री लगाना नहीं
सरकार के दूसरे चरण का फोकस केवल चिप बनाने की फैक्ट्री लगाने तक सीमित नहीं है। लक्ष्य सेमीकंडक्टर की पूरी वैल्यू चेन तैयार करना है—वेफर निर्माण, चिप निर्माण, डिजाइन और उससे जुड़े अन्य क्षेत्रों को एक साथ विकसित करना।
वैष्णव के मुताबिक, सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के पहले चरण में जिन परियोजनाओं को मंजूरी मिली, उनके काम शुरू होने से लेकर व्यावसायिक उत्पादन तक पहुंचने की गति पर उद्योग जगत ने खास ध्यान दिया है।
सरकार का कहना है कि भारत में उपलब्ध तकनीकी प्रतिभा, नीतिगत स्थिरता और कारोबार के लिए बेहतर वातावरण ने सेमीकंडक्टर विनिर्माण और डिजाइन के लिए देश में कंपनियों की रुचि बढ़ाई है।
दुनिया की चिप सप्लाई चेन में भारत की जगह
भारत अब खुद को वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की कोशिश कर रहा है। सरकार का लक्ष्य ऐसा इकोसिस्टम तैयार करना है जिसमें दुनिया की कंपनियों को चिप के उत्पादन और डिजाइन के लिए भारत की जरूरत बढ़े।
वैष्णव ने कहा कि देश में सेमीकंडक्टर का पूरा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना अगले 50 वर्षों तक भारतीय सेमीकंडक्टर उद्योग की निरंतर वृद्धि का आधार बन सकता है।
यानी भारत की कोशिश सिर्फ आज की चिप जरूरत पूरी करने की नहीं है। लक्ष्य ऐसी औद्योगिक क्षमता तैयार करना है, जो आने वाले दशकों में मोबाइल, इलेक्ट्रिक वाहन, AI, रक्षा, अंतरिक्ष और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसी नई तकनीकों की बढ़ती चिप जरूरत को देश के भीतर पूरा करने में मदद कर सके।
