भरपूर उत्पादन, फिर भी प्याज उछला, ‘कांदा एक्सप्रेस’ से राहत की उम्मीद

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नई दिल्ली, 29 अगस्त 2026। देश में प्याज का उत्पादन लगभग पिछले साल के बराबर रहने के बावजूद इसकी कीमतों में तेज उछाल आया है। 24 अगस्त को देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत सालाना आधार पर 59 प्रतिशत बढ़कर 43.53 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। एक साल पहले यह 27.37 रुपये प्रति किलो थी। औसत थोक कीमत भी 68 प्रतिशत बढ़कर 35.58 रुपये प्रति किलो हो गई।

दिलचस्प यह है कि वित्त वर्ष 2025-26 में प्याज का अनुमानित उत्पादन 307.37 लाख टन है, जबकि पिछले वर्ष यह 307.67 लाख टन था। यानी उत्पादन में बड़ी कमी नहीं है। इसके बावजूद अगस्त-सितंबर की मौसमी अवधि में आपूर्ति, मौसम और मांग के दबाव ने कीमतों को ऊपर धकेला है।

अगस्त-सितंबर में क्यों बढ़ते हैं दाम?

इस अवधि में पुरानी फसल और नई आवक के बीच आपूर्ति का दबाव बनता है। इसके साथ त्योहारी मांग, मौसम संबंधी व्यवधान और सप्लाई चेन में बदलाव भी कीमतों को प्रभावित करते हैं। इस बार इन कारकों के बीच बाजार भाव में अपेक्षाकृत तेज बढ़ोतरी हुई है।

सरकार ने खोला बफर स्टॉक

कीमतों पर नियंत्रण के लिए केंद्र ने अपने बफर स्टॉक से प्याज की लक्षित आपूर्ति शुरू की है। सरकार ने 2026 के लिए करीब 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक रखा है। प्रमुख खपत केंद्रों तक प्याज पहुंचाने के लिए रेलवे और सड़क परिवहन के हाइब्रिड मॉडल का इस्तेमाल किया जा रहा है।

नासिक से चली ‘कांदा एक्सप्रेस’

नासिक से दिल्ली के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ के जरिए करीब 800 टन प्याज भेजा गया है। दिल्ली में इसे नेफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार के माध्यम से 35 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है। चेन्नई, एर्नाकुलम, मदुरै और गुवाहाटी जैसे अन्य बड़े खपत केंद्रों तक भी रेलवे रेक से प्याज भेजा जा रहा है।

‘कांदा एक्सप्रेस’ के जरिए बड़े पैमाने पर प्याज की आवाजाही पहले भी की जा चुकी है। 2025-26 में 86 रेलवे रेक के जरिए 16 प्रमुख शहरों तक करीब 88 हजार टन बफर स्टॉक प्याज भेजा गया था।

अब असली सवाल—कितनी राहत मिलेगी?

सरकार की कोशिश बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों के दबाव को कम करने की है। उत्पादन पर्याप्त होने के बावजूद यदि आपूर्ति का मौसमी अंतर कम किया जा सका तो आने वाले दिनों में कीमतों पर दबाव घट सकता है।

इसलिए फिलहाल प्याज की कहानी उत्पादन की कमी से ज्यादा सही समय पर बाजार में पर्याप्त आपूर्ति पहुंचाने की चुनौती बन गई है।

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