2030 की आर्थिक साझेदारी रणनीति को अंतिम रूप देने की दिशा में प्रगति; वैश्विक मूल्य श्रृंखला, डिजिटल सेवाओं और MSME अंतरराष्ट्रीयकरण पर जोर
जयपुर। 8 अगस्त 2026। वाय के न्यूज। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत जयपुर में हुई 16वीं ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों की बैठक में सदस्य देशों ने व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले किए। बैठक में ‘जयपुर सहमति’, निर्यातोन्मुख एमएसएमई के लिए क्रेडिट असेसमेंट के मार्गदर्शक सिद्धांत और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने की कार्ययोजना को आगे बढ़ाया गया। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने की।
बैठक के बाद अध्यक्ष का वक्तव्य और निष्कर्ष दस्तावेज जारी किया गया। इसमें चार प्रमुख अनुबंध शामिल हैं। इनका संबंध बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था, एमएसएमई के अंतरराष्ट्रीयकरण, वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं और सीमा-पार डिजिटल सेवाओं से है।
छोटे उद्योगों के लिए संपत्ति नहीं, कैश फ्लो बनेगा आधार
बैठक का एक प्रमुख फैसला छोटे और मध्यम निर्यात कारोबारियों के लिए व्यापार वित्त की पहुंच आसान करने से जुड़ा है। सदस्य देशों ने ब्रिक्स इनवॉइस डिस्काउंटिंग सिस्टम का अध्ययन करने के लिए ‘जयपुर सहमति’ जारी की।
इसके साथ निर्यात से जुड़े एमएसएमई के लिए क्रेडिट असेसमेंट गाइडिंग प्रिंसिपल्स को मंजूरी दी गई। इसके तहत छोटे कारोबारियों की ऋण क्षमता का आकलन केवल उनके पास उपलब्ध गिरवी योग्य संपत्तियों के आधार पर नहीं, बल्कि कैश फ्लो को भी महत्वपूर्ण आधार मानकर करने की दिशा में काम होगा।
भारत सरकार के अनुसार वैश्विक स्तर पर व्यापार वित्त में करीब 2.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का अंतर है, जिसका असर छोटे कारोबारियों पर विशेष रूप से पड़ता है।
वैश्विक सप्लाई चेन मजबूत करने की योजना
बैठक में ब्रिक्स देशों के बीच अधिक विविध और मजबूत ग्लोबल वैल्यू चेन (GVC) विकसित करने पर भी सहमति बनी। इसके लिए 2026-2030 की कार्ययोजना तैयार की गई है।
इसमें ब्रिक्स टेक्निकल काउंसिल, ब्रिक्स कनेक्ट और संयुक्त अध्ययन जैसी पहलों के अलावा फार्मास्यूटिकल्स, खाद्य सुरक्षा और रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जुड़े निवेश मंच विकसित करने की संभावनाएं शामिल हैं।
डिजिटल सेवाओं के लिए साझा सिद्धांत
ब्रिक्स देशों ने सीमा-पार डिजिटल सेवाओं को सुगम बनाने के सिद्धांतों को भी मंजूरी दी। इसका उद्देश्य सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है।
भारत ने ब्रिक्स देशों के बीच संतुलित व्यापार, सेवाओं में व्यापार बढ़ाने और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में विविधता लाने पर जोर दिया।
WTO को केंद्र में रखने पर भारत का जोर
बैठक में भारत ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) पर आधारित बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। भारत ने विकासशील देशों के लिए विशेष एवं विभेदक व्यवहार बनाए रखने तथा WTO की दो-स्तरीय और बाध्यकारी विवाद निपटान व्यवस्था को फिर से पूरी तरह सक्रिय करने की वकालत की।
भारत ने यह भी कहा कि खाद्य और आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विकासशील देशों को आवश्यक नीतिगत विकल्प उपलब्ध रहने चाहिए।
ब्रिक्स आर्थिक साझेदारी रणनीति 2030 पर आगे बढ़ा काम
बैठक में ‘ब्रिक्स आर्थिक साझेदारी रणनीति 2030’ को अंतिम रूप देने की दिशा में हुई प्रगति की भी सराहना की गई। इसमें बहुपक्षीय व्यापार, सेवा क्षेत्र, डिजिटल अर्थव्यवस्था, उद्योग, नवाचार, तकनीक, निवेश, वित्तीय सहयोग और सतत विकास जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
मंत्रियों ने रणनीति को ब्रिक्स शीर्ष नेताओं के अंतिम अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करने पर सहमति जताई।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत हुई यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब समूह अपने विस्तार के बाद वैश्विक व्यापार और आर्थिक व्यवस्था में अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
