नई दिल्ली, 7 अगस्त 2026, वाय के न्यूज। संसद ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया है। राज्यसभा से मंजूरी मिलने के बाद गुरुवार को लोकसभा ने भी विधेयक को पारित कर दिया। इसका उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना और भुगतान संबंधी विवादों के निपटारे की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी एवं समयबद्ध बनाना है।
लोकसभा में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी ने यह विधेयक पेश किया। यह एमएसएमई विकास अधिनियम, 2006 में संशोधन करता है।
संशोधित कानून के तहत सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसई) को एमएसएमई से खरीदे गए सामान और सेवाओं के बिलों का भुगतान ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) के माध्यम से करना होगा। सरकार का मानना है कि इससे भुगतान में पारदर्शिता आएगी और उद्यमों को समय पर राशि मिल सकेगी।
विधेयक में विवाद निपटारे की समय-सीमा भी तय की गई है। यदि सुलह (मध्यस्थता) की प्रक्रिया विफल रहती है तो मामला उसके समाप्त होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) के लिए भेजना अनिवार्य होगा। वहीं, दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद 90 दिनों के भीतर निर्णय देना होगा।
संशोधन में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि कोई मामला छह महीने से अधिक समय तक लंबित रहता है तो आपूर्तिकर्ता को निर्णय की राशि का कम से कम 50 प्रतिशत भुगतान किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे छोटे और मझोले उद्यमों पर भुगतान में देरी का वित्तीय बोझ कम होगा।
विधेयक पारित होने के दौरान लोकसभा में विपक्ष ने नीट मुद्दे को लेकर हंगामा किया। लगातार व्यवधान के बीच पीठासीन अधिकारी ने सदन की कार्यवाही पहले दोपहर तक और बाद में पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी। इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ के अवसर पर महात्मा गांधी, स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
