नई दिल्ली, 18 अगस्त। वाय के न्यूज। देश में मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दूसरी मशीनों में इस्तेमाल होने वाले जरूरी पुर्जों का उत्पादन बढ़ाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) के तहत 31 और कंपनियों के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है।
इन परियोजनाओं में कंपनियां करीब 7,900 करोड़ रुपये का निवेश करेंगी। सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं से करीब 82,000 करोड़ रुपये के इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों का उत्पादन होने और 9,500 से अधिक लोगों को सीधे रोजगार मिलने की उम्मीद है।
नई मंजूरियां 10 राज्यों से मिली हैं। इनमें तमिलनाडु की सात, महाराष्ट्र और हरियाणा की छह-छह परियोजनाएं शामिल हैं। इन कंपनियों में एसीटिलीन ब्लैक, स्पीकर-माइक्रोफोन, ऑप्टिकल ट्रांसीवर, कैपेसिटर और कॉइल जैसे इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे बनाए जाएंगे।
106 कंपनियों को मंजूरी
इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में कंपनियों को मंजूरी पत्र सौंपे। उन्होंने बताया कि इन 31 नई मंजूरियों के बाद ईसीएमएस के तहत अब तक 106 कंपनियों के प्रस्ताव मंजूर किए जा चुके हैं।
सरकार ने इस योजना के तहत 59 हजार करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा था। मंजूर परियोजनाओं के साथ अब यह निवेश 69 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
पांच लाख करोड़ से ज्यादा का उत्पादन
सरकार का अनुमान है कि ईसीएमएस के तहत मंजूर परियोजनाओं से आगे चलकर पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक के इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों का उत्पादन हो सकता है। इससे 75 हजार से अधिक लोगों को सीधे रोजगार मिलने की उम्मीद है।
मंत्री वैष्णव ने कहा कि योजना का मकसद केवल देश में इलेक्ट्रॉनिक सामान जोड़ना या असेंबल करना नहीं है। मोबाइल और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में लगने वाले जरूरी पुर्जे और कच्चा माल भी देश में ही बनाया जाए, इसके लिए उत्पादन क्षमता विकसित की जा रही है।
इलेक्ट्रॉनिक उत्पादन सात गुना बढ़ा
वैष्णव के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में देश का इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण सात गुना बढ़कर 13 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का निर्यात भी इस दौरान 11 गुना बढ़कर चार लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
उन्होंने कहा कि नई परियोजनाओं से देश में इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने के लिए जरूरी पुर्जों की उपलब्धता बढ़ेगी, विदेशों से होने वाली खरीद पर निर्भरता कम होगी और भारत में आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उद्योग को और मजबूती मिलेगी।
राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि पिछले एक दशक में इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का देश में उत्पादन सात गुना से अधिक बढ़ा है। कार्यक्रम में मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन भी मौजूद रहे।
