नई दिल्ली, 18 अगस्त। वाय के न्यूज। भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का इस्तेमाल अब केवल समझौते करने तक सीमित नहीं रह गया है। सरकार के अनुसार, निर्यातकों द्वारा इन समझौतों के तहत मिलने वाली शुल्क रियायतों का लाभ लेने की प्रक्रिया तेज हुई है। इसका संकेत तरजीही मूल प्रमाणपत्र (CoO) जारी होने की बढ़ती संख्या और एफटीए साझेदार देशों को निर्यात किए जाने वाले उत्पादों की बढ़ती विविधता से मिलता है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल वस्तु एवं सेवा निर्यात 863.1 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। इसमें वस्तु निर्यात 441.8 अरब डॉलर था। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून 2026 में कुल निर्यात 232.73 अरब डॉलर रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 11.37 प्रतिशत अधिक है।

यूएई सबसे बड़ा एफटीए निर्यात बाजार
एफटीए साझेदार देशों में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार रहा। 2025-26 में भारत ने यूएई को 37.36 अरब डॉलर का माल निर्यात किया। भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) 1 मई 2022 को लागू हुआ था। सरकार के अनुसार, 2024-25 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 100.06 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
भारत और यूएई ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य भी तय किया है।

ऑस्ट्रेलिया को निर्यात में 80 फीसदी से ज्यादा वृद्धि
भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौता (ECTA) दिसंबर 2022 में लागू हुआ। सरकार के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया को भारत का निर्यात 2020-21 के करीब 4 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 7.28 अरब डॉलर हो गया। यह 80 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है।
ऑस्ट्रेलिया ने अपनी 98.3 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर तत्काल शून्य शुल्क पहुंच प्रदान की थी। 2026 से भारतीय निर्यात के लिए ऑस्ट्रेलियाई बाजार में शून्य शुल्क पहुंच का प्रावधान लागू होने की बात भी सरकार ने कही है।
मूल प्रमाणपत्रों का बढ़ा इस्तेमाल
एफटीए का लाभ लेने के लिए निर्यातकों को आम तौर पर यह प्रमाणित करना होता है कि उनका माल संबंधित समझौते में निर्धारित मूल नियमों को पूरा करता है। इसके लिए तरजीही मूल प्रमाणपत्र (Certificate of Origin-CoO) महत्वपूर्ण है।
सरकार के मुताबिक, भारत-यूएई CEPA और भारत-ऑस्ट्रेलिया ECTA के तहत बड़ी संख्या में CoO जारी हुए हैं। नए समझौतों में भी तेजी से इस्तेमाल देखा गया है। भारत-ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) के अक्टूबर 2025 में लागू होने के बाद 7,885 CoO जारी किए गए, जबकि ओमान CEPA के जून 2026 में लागू होने के बाद 783 CoO जारी हुए।
नए बाजारों में उत्पादों की पहुंच बढ़ी
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, एफटीए के तहत निर्यात की जाने वाली टैरिफ लाइनों में भी वृद्धि हुई है। यूएई में यह संख्या 2021-22 के 7,546 से बढ़कर 2025-26 में 8,053 हो गई। ऑस्ट्रेलिया में 5,396 से बढ़कर 5,668 और मॉरीशस में 3,593 से बढ़कर 4,345 टैरिफ लाइन हो गईं। ओमान में मई 2026 के 2,879 से जून 2026 में यह संख्या बढ़कर 3,371 हो गई।
इन समझौतों से वस्त्र, कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य, चमड़ा-फुटवियर, समुद्री उत्पाद, रत्न-आभूषण, कालीन और हस्तशिल्प जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को नए बाजारों तक पहुंच मिलने की संभावना है।
सेवा क्षेत्र में भी बढ़ रहे अवसर
एफटीए का दायरा केवल वस्तुओं तक सीमित नहीं है। भारत के हालिया समझौतों में IT, स्वास्थ्य, शिक्षा, वित्त, इंजीनियरिंग, पर्यटन और अन्य पेशेवर सेवाओं के लिए बाजार पहुंच और पेशेवरों की आवाजाही से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।
भारत-न्यूजीलैंड एफटीए में 5,000 कुशल भारतीयों के लिए तीन साल तक रहने का मार्ग उपलब्ध कराने का प्रावधान है। भारत-ईयू एफटीए में IT/ITES, पेशेवर, शिक्षा, वित्तीय, पर्यटन और निर्माण सेवाओं सहित 144 सेवा उप-क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सेवा निर्यात 421.3 अरब डॉलर रहा।
दस और व्यापार समझौतों पर बातचीत
भारत मौजूदा एफटीए के इस्तेमाल को बढ़ाने के साथ नए समझौतों का नेटवर्क भी विस्तार दे रहा है। सरकार के अनुसार, करीब दस व्यापार समझौतों पर बातचीत जारी है। इनमें यूरेशियन आर्थिक संघ, पेरू, चिली, इजरायल, कनाडा और मालदीव के साथ प्रस्तावित समझौते शामिल हैं। भारत-कोरिया CEPA और भारत-श्रीलंका ETCA जैसे मौजूदा समझौतों को भी उन्नत करने की प्रक्रिया चल रही है।
सरकार का कहना है कि एफटीए का अगला चरण समझौतों की संख्या बढ़ाने के बजाय इनके वास्तविक इस्तेमाल को बढ़ाने, निर्यात भागीदारी और उत्पाद विविधता को मजबूत करने तथा भारतीय कारोबारों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने पर केंद्रित है।
