जेन-जी आंदोलन के बाद सामाजिक बदलाव पर रायपुर में परिचर्चा, नई पीढ़ी की राजनीतिक चेतना पर मंथन

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लोकतांत्रिक भागीदारी, अहिंसक प्रतिरोध और सामाजिक परिवर्तन के विभिन्न पहलुओं पर हुई चर्चा

रायपुर, 1 सितंबर 2026। जेन-जी आंदोलन को केवल एक तात्कालिक घटना के बजाय बदलती युवा चेतना, लोकतांत्रिक आकांक्षाओं और व्यापक सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया के संदर्भ में समझने की जरूरत है। रायपुर में आयोजित परिचर्चा में प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और युवाओं ने नई पीढ़ी की राजनीतिक जागरूकता, लोकतांत्रिक भागीदारी, अहिंसक प्रतिरोध और सामाजिक बदलाव पर विचार रखे।

जेन-जी आंदोलन के बाद सामाजिक परिवर्तन’ विषय पर यह परिचर्चा टिकरापारा के सिद्धार्थ चौक स्थित गुडविल्स हॉस्पिटल के सेमिनार हॉल में आयोजित की गई। आयोजन छत्तीसगढ़ी समाज, डॉक्टर्स ऑन स्ट्रीट (दोस्त) और प्रोग्रेसिव यूटिलाइजेशन ऑफ रिसर्च एंड इकॉनॉमिक्स (प्योर) के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि योजना, कृषि और ग्रामीण विकास के विशेषज्ञ एवं सलाहकार प्रदीप शर्मा थे। अध्यक्षता छत्तीसगढ़ी समाज के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सत्यजीत साहू ने की। वरिष्ठ पत्रकार, छत्तीसगढ़ी गीतकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता देवेश तिवारी तथा छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण आंदोलन के प्रमुख नेता रहे सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. उदयभान सिंह चौहान विशेष अतिथि एवं वक्ता के रूप में शामिल हुए।

जेन-जी की सामाजिक-राजनीतिक चेतना को समझना जरूरी : प्रदीप शर्मा

प्रदीप शर्मा ने भारतीय इतिहास में सामाजिक आंदोलनों और उनकी बदलती भाषा का उल्लेख करते हुए कहा कि जेन-जी को केवल एक आयु वर्ग के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है। इस पीढ़ी में विकसित हो रही सामाजिक और राजनीतिक चेतना को समझना जरूरी है।

उन्होंने जेन-जी के जीवन-मूल्यों, अहिंसक प्रतिरोध, सामाजिक सोच और लोकतांत्रिक चेतना में हो रहे बदलावों पर विस्तार से चर्चा की।

नई पीढ़ी में राजनीतिक जागरूकता बढ़ रही : देवेश तिवारी

वरिष्ठ पत्रकार देवेश तिवारी ने छत्तीसगढ़ी भाषा में अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने जेन-जी आंदोलन की नवीनता और इस पीढ़ी में दिखाई दे रही राजनीतिक जागरूकता पर विचार रखे।

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी में सामाजिक और राजनीतिक जागरूकता बढ़ रही है। युवाओं के अभिव्यक्ति के नए माध्यमों, सामाजिक संवेदनशीलता और राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रति सजगता को उन्होंने वर्तमान समय के महत्वपूर्ण बदलावों के रूप में रेखांकित किया।

लोकतंत्र में समझदारी के साथ भागीदारी जरूरी : डॉ. उदयभान सिंह चौहान

डॉ. उदयभान सिंह चौहान ने कहा कि किसी भी सामाजिक परिवर्तन को स्थायी और रचनात्मक दिशा देने के लिए परंपरा, अनुभव और नई चेतना के बीच संतुलन जरूरी है। उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नई पीढ़ी की समझदारी के साथ भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया।

लोकतंत्र की विभिन्न आवाजों का सामाजिक एकत्रीकरण जरूरी : डॉ. सत्यजीत साहू

अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. सत्यजीत साहू ने कहा कि लोकतंत्र में मौजूद विभिन्न आवाजों का सामाजिक एकत्रीकरण जरूरी है। लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति केवल संस्थाओं में नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों, विचारों और अनुभवों को संवाद के साझा मंच पर लाने में है।

जेन-जी प्रतिनिधियों ने भी रखे विचार

परिचर्चा में जेन-जी समुदाय की ओर से संस्कृति ठाकुर, होनेशा ठाकुर और अजहान अली ने अपने विचार रखे। उन्होंने नई पीढ़ी की सोच, आकांक्षाओं और सामाजिक सरोकारों को सामने रखा।

परिचर्चा की शुरुआत ‘दोस्त’ संस्था के निवर्तमान अध्यक्ष सुनील शर्मा ने की। उन्होंने कृषि क्रांति, औद्योगिक क्रांति, स्वतंत्रता संग्राम, लोकतंत्र की स्थापना और उसकी विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए जेन-जी आंदोलन को सामाजिक चेतना की निरंतर प्रक्रिया की नई कड़ी के रूप में देखने की बात कही।

कार्यक्रम का स्वागत एडवोकेट संतोष ठाकुर ने किया। उन्होंने परिचर्चा के उद्देश्य और उसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

डॉ. संगीता कौशिक और स्वाति देवांगन का सम्मान

कार्यक्रम के प्रारंभ में ‘दोस्त’ संस्था की नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. संगीता कौशिक और ‘प्योर’ संस्था की नवनियुक्त अध्यक्ष स्वाति देवांगन का शॉल एवं श्रीफल से सम्मान किया गया। दोनों को नई जिम्मेदारियों के लिए शुभकामनाएं दी गईं।

युवा कवि तारिक खान ने प्रस्तुत किया काव्य-पाठ

कार्यक्रम में युवा कवि तारिक खान ने काव्य-पाठ किया। उनके काव्य-पाठ ने परिचर्चा के गंभीर वैचारिक वातावरण में रचनात्मकता और संवेदना का नया आयाम जोड़ा।

सामाजिक, साहित्यिक और बौद्धिक क्षेत्र के लोगों की मौजूदगी

परिचर्चा में सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक, पत्रकारिता, चिकित्सा एवं बौद्धिक क्षेत्र से जुड़े कई लोग शामिल हुए। इनमें सूरज दुबे, आचार्य रितेश्वरानंद अवधूत, के.पी. सिंह, आलोक पुतुल, जी.पी. चंद्राकर, किशन देवांगन और गुलशन मानसरोवर सहित अन्य प्रबुद्ध नागरिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।

आयोजकों के अनुसार परिचर्चा ने नई पीढ़ी और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद के लिए मंच उपलब्ध कराया। चर्चा में इस बात पर जोर रहा कि भारत में सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया लगातार गतिशील है और प्रत्येक पीढ़ी इस यात्रा में अपनी भूमिका तय करती है।

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