छत्तीसगढ़ में UCC ड्राफ्टिंग तेज, जमीनी सर्वे और शोध पर जोर

यह समाचार साझा करें

WhatsApp Facebook X

पढ़ने की सुविधा

अपनी सुविधा के अनुसार अक्षर और कंट्रास्ट चुनें।

अक्षर आकार

कुलपतियों ने विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और भरण-पोषण जैसे मुद्दों पर दिए सुझाव

रायपुर, 7 सितंबर, वाय के न्यूज। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) के मसौदे को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। राज्य शासन द्वारा गठित UCC समिति की उच्चस्तरीय बैठक में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और गोद लेने जैसे विषयों पर सुझाव दिए। बैठक में कानून को राज्य की सामाजिक परिस्थितियों और लोगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर जोर रहा।

बैठक में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार और सेवानिवृत्त प्राचार्या ज्योति रानी सिंह के समक्ष कुलपतियों ने अपने विचार रखे। चर्चा में पारंपरिक सामाजिक मान्यताओं, मौजूदा कानूनी व्यवस्था और संभावित वैधानिक सुधारों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया।

HNLU ने तकनीकी-कानूनी सहयोग की बात कही

हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HNLU) के कुलपति प्रोफेसर विवेकानंदन ने पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से UCC से जुड़े विस्तृत सुझाव प्रस्तुत किए। उन्होंने मसौदे को मजबूत, निष्पक्ष और न्यायसंगत बनाने के लिए विश्वविद्यालय की ओर से तकनीकी और कानूनी सहयोग उपलब्ध कराने की बात कही।

चर्चा में UCC के तहत विवाह, तलाक, गोद लेने और उत्तराधिकार जैसे व्यक्तिगत कानून से जुड़े विषयों में समान नियमों की संभावित व्यवस्था पर भी विचार हुआ। महिलाओं के अधिकार और समानता से जुड़े पहलुओं को भी महत्वपूर्ण माना गया।

सभी जिलों में सर्वे का सुझाव

पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सच्चिदानंद शुक्ला ने मसौदे को अकादमिक शोध पर आधारित बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने समाजशास्त्र, मानवशास्त्र और विधि के विशेषज्ञों तथा शोधकर्ताओं के अध्ययन को ड्राफ्टिंग प्रक्रिया में शामिल करने का सुझाव दिया।

उन्होंने प्रदेश के सभी जिलों में जमीनी सर्वे कराने और आम लोगों से सीधे फीडबैक लेने पर भी जोर दिया। इससे अलग-अलग क्षेत्रों की सामाजिक परिस्थितियों, परंपराओं और व्यवहारिक चुनौतियों को समझने में मदद मिल सकती है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मनोज दयाल ने भी बैठक में सुझाव रखे।

अंतिम मसौदे में सुझाव शामिल करने का आश्वासन

UCC समिति के सदस्यों एम.के. राउत, मोहन पवार और ज्योति रानी सिंह ने कुलपतियों के सुझावों को महत्वपूर्ण बताते हुए इन्हें ड्राफ्टिंग प्रक्रिया में प्राथमिकता देने की बात कही। समिति के अनुसार जन-संवाद, अकादमिक शोध और विधिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मसौदा तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

पाठकों की पसंद

सबसे अधिक पढ़े गए

पिछले 7 दिनों के आधार पर