कांकेर के बाद बिलासपुर में भी मलेरिया का कहर

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कोटा के वनांचल में स्वास्थ्य विभाग का विशेष अभियान


कांकेर में मौतों पर NHRC की सख्ती के बाद रोकथाम और निगरानी पर जोर

बिलासपुर, 3 अगस्त, वाय के न्यूज। बिलासपुर जिले के कोटा विकासखंड में मलेरिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित वनांचल क्षेत्रों में विशेष निगरानी अभियान शुरू किया है। कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास तथा शिक्षा विभाग संयुक्त रूप से मलेरिया नियंत्रण, कुपोषण उन्मूलन और बच्चों की स्वास्थ्य निगरानी पर काम कर रहे हैं।

24 जुलाई को कलेक्टर ने औरापानी, नवाडीह, मझगांव तथा उप स्वास्थ्य केंद्र मझगांव का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान औरापानी में प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम (PF) मलेरिया के तीन तथा नवाडीह में एक संक्रमित बच्चे की पुष्टि हुई। सभी बच्चों का प्राथमिक उपचार कर उन्हें बेहतर इलाज के लिए सिम्स बिलासपुर भेजा गया। इसके बाद प्रभावित गांवों में सघन सर्वे, त्वरित जांच और उपचार अभियान चलाया गया।

इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने कोटा, शिवतराई, केंदा, औरापानी तथा आसपास के गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाए। आधिकारिक जानकारी के अनुसार एक दिन में 356 लोगों की जांच की गई, जिसमें तीन नए मलेरिया मरीज मिले। स्थानीय प्रशासन के अनुसार पिछले दिनों कोटा क्षेत्र में 25 मलेरिया मरीजों की पुष्टि होने के बाद निगरानी और तेज कर दी गई है।

मलेरिया के साथ-साथ कुपोषण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में अनुपस्थित बच्चों की स्वास्थ्य जांच, अति कुपोषित बच्चों की पहचान तथा गर्भवती महिलाओं को स्थानीय पोषणयुक्त भोजन अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। मझगांव में एक अति कुपोषित बच्चे को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) भेजने की पहल भी की गई।

इस बीच, उत्तर बस्तर (कांकेर) में मलेरिया से 13 दिनों के भीतर पांच लोगों की मौत की मीडिया रिपोर्टों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने इसे प्रथम दृष्टया मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला मानते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने संकेत दिया है कि यदि जांच में स्वास्थ्य सेवाओं या प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो जवाबदेही तय की जानी चाहिए

कांकेर की घटनाओं के बाद प्रदेश में मलेरिया नियंत्रण को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। ऐसे में बिलासपुर के कोटा क्षेत्र में समय पर जांच, उपचार, घर-घर सर्वे और निरंतर निगरानी को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके और किसी भी गंभीर स्थिति से बचा जा सके।

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