एफआईआर से अदालत तक अब डिजिटल न्याय प्रक्रिया, नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ ने बढ़ाई रफ्तार

यह समाचार साझा करें

WhatsApp Facebook X

पढ़ने की सुविधा

अपनी सुविधा के अनुसार अक्षर और कंट्रास्ट चुनें।

अक्षर आकार

रायपुर, 2 अगस्त, वाय के न्यूज। छत्तीसगढ़ में नए आपराधिक कानूनों के लागू होने के साथ न्याय व्यवस्था तेजी से डिजिटल स्वरूप ले रही है। राज्य के सभी पुलिस थाने ऑनलाइन हो चुके हैं, करीब 1.98 लाख एफआईआर डिजिटल माध्यम से दर्ज की जा चुकी हैं और पुलिस, अभियोजन, न्यायालय तथा जेल विभाग के बीच सूचनाओं के रियल-टाइम आदान-प्रदान के लिए इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) का विस्तार किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि ई-साक्ष्य, ई-समन और डिजिटल फॉरेंसिक जैसी व्यवस्थाओं से अपराध जांच और न्यायिक प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज, पारदर्शी और जवाबदेह होगी।

रायपुर में रविवार को आयोजित “स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस” राज्य स्तरीय कार्यशाला में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम केवल पुराने कानूनों का प्रतिस्थापन नहीं हैं, बल्कि न्याय व्यवस्था की सोच और कार्यप्रणाली में बदलाव का आधार हैं। उन्होंने कहा कि नए कानूनों का केंद्र अपराधी नहीं, बल्कि पीड़ित और आम नागरिक है, जिसे समयबद्ध और प्रभावी न्याय मिलना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते दौर में अपराधों की प्रकृति भी बदल गई है। ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा, सीसीटीवी फुटेज और वैज्ञानिक फॉरेंसिक जांच को कानूनी मान्यता देकर जांच प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य में अब तक 1 लाख 97 हजार 547 एफआईआर ऑनलाइन दर्ज की जा चुकी हैं और सभी थाने सीसीटीएनएस नेटवर्क से जुड़े हैं। नागरिकों को डिजिटल हस्ताक्षरित एफआईआर की प्रति भी उपलब्ध कराई जा रही है।

उन्होंने कहा कि ई-समन से समन की तामील में लगने वाला समय घटा है, जबकि “न्याय श्रुति” के माध्यम से न्यायालयीन कार्यवाही का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। इसके साथ ही आईसीजेएस के जरिए पुलिस, अभियोजन, न्यायालय और जेल विभाग के बीच सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान संभव हो रहा है, जिससे मामलों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती को देखते हुए राज्य में नौ नए साइबर थाने स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि नए कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन केवल तकनीक से नहीं, बल्कि प्रशिक्षित मानव संसाधन से भी जुड़ा है। इसलिए पुलिस, अभियोजन और न्यायिक अधिकारियों के लिए निरंतर प्रशिक्षण, तकनीकी क्षमता विकास और नियमित मॉनिटरिंग पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने कहा कि नए आपराधिक कानून न्याय प्रणाली को अधिक वैज्ञानिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव हैं। उन्होंने कहा कि कानूनों की सफलता उनके प्रभावी क्रियान्वयन में निहित है। ई-साक्ष्य, ई-चालान, न्याय श्रुति और डिजिटल फॉरेंसिक जैसी व्यवस्थाएं न्यायिक प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाएंगी। उन्होंने बताया कि जून में जिला न्यायालयों में 9,910 तथा उच्च न्यायालय में 58 मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई।

उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि अब “वन डेटा, वन एंट्री” मॉडल पर काम किया जा रहा है, जिससे एक ही जानकारी अलग-अलग स्तर पर बार-बार दर्ज करने की आवश्यकता समाप्त होगी। उन्होंने एफआईआर की मैनुअल प्रक्रिया समाप्त करने तथा ई-फॉरेंसिक, ई-साक्ष्य और अन्य डिजिटल प्रणालियों के व्यापक उपयोग पर जोर दिया।

पाठकों की पसंद

सबसे अधिक पढ़े गए

पिछले 7 दिनों के आधार पर