V2V : अब मोटर-गाड़ियां आपस में करेंगी ‘बात’, सड़क हादसे रोकने के लिए सरकार लाएगी नई तकनीक

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2028 से नए वाहनों में नयी संचार प्रणाली अनिवार्य करने का प्रस्ताव, अचानक ब्रेक, टक्कर और आपात स्थिति की मिलेगी पहले ही सूचना

नई दिल्ली, 3 अगस्त, वाय के न्यूज। कल्पना कीजिए कि सड़क पर चल रही आपकी कार को आगे चल रहे वाहन के अचानक ब्रेक लगाने या कुछ दूरी पर होने वाली दुर्घटना की जानकारी पहले ही मिल जाए। इससे चालक समय रहते सतर्क हो सके और हादसा टल जाए। ऐसी ही तकनीक को भारत में लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने वाहन-से-वाहन (Vehicle-to-Vehicle या V2V) संचार प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू करने के लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन का मसौदा जारी किया है। इस तकनीक के जरिए वाहन आपस में बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के गति, दिशा, स्थान और ब्रेक लगाने जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा करेंगे।

इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि चालक को अचानक ब्रेक, आगे टक्कर की आशंका, गलत दिशा से आते वाहन, असुरक्षित लेन परिवर्तन और एंबुलेंस या फायर ब्रिगेड जैसे आपातकालीन वाहनों के आने की चेतावनी पहले ही मिल जाएगी। इससे सड़क दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।

मंत्रालय का कहना है कि यह तकनीक केवल वाहन में लगे कैमरों और सेंसर पर निर्भर नहीं होगी, बल्कि आसपास के अन्य वाहनों से भी सीधे संवाद करेगी। इसलिए चालक की नजर से ओझल खतरे की जानकारी भी समय रहते मिल सकेगी। भविष्य में यही तकनीक कनेक्टेड कारों, एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) और स्मार्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम की आधारशिला बनेगी।

2027 से शुरुआत, 2028 से अनिवार्यता

प्रस्ताव के अनुसार, 1 अक्टूबर 2027 से बनने वाले जिन नए वाहनों में V2V प्रणाली होगी, उन्हें AIS-230 तकनीकी मानक का पालन करना होगा। इसके बाद 1 अक्टूबर 2028 से श्रेणी L, M और N के सभी नए वाहनों में यह प्रणाली अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। इनमें दोपहिया, कार, बस और ट्रक जैसे अधिकांश मोटर वाहन शामिल हैं।

साइबर सुरक्षा का भी रखा गया ध्यान

नई प्रणाली के लिए तैयार किए गए AIS-230 मानक में रेडियो संचार, जीपीएस आधारित लोकेशन, साइबर सुरक्षा, संचार सुरक्षा, विद्युत सुरक्षा और प्रदर्शन से जुड़े विस्तृत मानक तय किए गए हैं। साथ ही आपातकालीन ब्रेक चेतावनी, आगे टक्कर की चेतावनी, गलत दिशा में वाहन चलने और इमरजेंसी वाहन अलर्ट जैसी सुविधाएं भी शामिल की गई हैं।

अभी मांगे गए हैं सुझाव

मंत्रालय ने मसौदा अधिसूचना पर 30 दिनों के भीतर आम जनता, वाहन निर्माताओं और अन्य हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। इनके परीक्षण के बाद अंतिम नियम अधिसूचित किए जाएंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में हर वर्ष होने वाली बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए V2V तकनीक सुरक्षित और बुद्धिमान परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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