‘बाइक एम्बुलेंस’ को मिलेगी कानूनी पहचान, सरकार लाई नया नियम

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ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में आपातकालीन चिकित्सा सेवा होगी तेज, पहली बार बनेगा राष्ट्रीय नियामक ढांचा

नई दिल्ली, 3 अगस्त, वाय के न्यूज। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने देश में दोपहिया सड़क एम्बुलेंस (बाइक एम्बुलेंस) के संचालन के लिए पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर नियामक ढांचा तैयार करने की पहल की है। इसके लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन का मसौदा जारी किया गया है। उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों में आपातकालीन चिकित्सा सहायता तेजी से उपलब्ध कराना है, जहां सामान्य एम्बुलेंस समय पर नहीं पहुंच पाती।

मंत्रालय के अनुसार, ग्रामीण, पहाड़ी और दूरदराज के इलाकों के अलावा संकरी गलियों वाले शहरी क्षेत्रों में भी बाइक एम्बुलेंस मरीज तक जल्दी पहुंच सकती है। दुर्घटना या गंभीर बीमारी की स्थिति में शुरुआती उपचार और मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने में यह व्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

पहली बार तय होंगे राष्ट्रीय मानक

अभी तक केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में दोपहिया सड़क एम्बुलेंस के लिए अलग श्रेणी या मानक निर्धारित नहीं हैं। प्रस्तावित संशोधन के तहत AIS-209 (भाग-1): 2026 को अपनाते हुए इनके निर्माण, सुरक्षा, मरीज को ले जाने की व्यवस्था, पंजीकरण, फिटनेस और संचालन के लिए एक समान राष्ट्रीय मानक लागू किए जाएंगे।

1 अक्टूबर 2027 से लागू होगा प्रावधान

मसौदे के अनुसार, 1 अक्टूबर 2027 या उसके बाद निर्मित एल-2 श्रेणी की सभी बाइक एम्बुलेंस को नए मानकों का पालन करना होगा। इसी तारीख से इन वाहनों पर लगने वाली आपातकालीन चेतावनी लाइटों के लिए भी निर्धारित मानक लागू होंगे। राज्य सरकारें स्थानीय जरूरत के अनुसार इनके संचालन का क्षेत्र तय कर सकेंगी।

हर दो वर्ष में होगी फिटनेस जांच

बाइक एम्बुलेंस को परिवहन वाहन की श्रेणी में रखा जाएगा। इनके लिए हर दो वर्ष में फिटनेस प्रमाणपत्र का नवीनीकरण अनिवार्य होगा। निरीक्षण के दौरान स्ट्रेचर, मरीज को सुरक्षित बांधने की व्यवस्था, लोडिंग-अनलोडिंग प्रणाली, टायर, ब्रेक, चेतावनी लाइट, अग्निशामक यंत्र और अन्य सुरक्षा उपकरणों की जांच की जाएगी।

मरीज और चालक, दोनों की सुरक्षा पर जोर

नए मानकों में वाहन की स्थिरता, ब्रेकिंग क्षमता, पीछे की दृश्यता, सुरक्षित कपलिंग, मरीज को मौसम और झटकों से बचाने की व्यवस्था तथा आपातकालीन चेतावनी प्रणाली जैसी तकनीकी आवश्यकताओं को शामिल किया गया है। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छोटी होने के बावजूद बाइक एम्बुलेंस सुरक्षा के मामले में किसी तरह का समझौता न करे।

सुझाव आमंत्रित

मंत्रालय ने मसौदा अधिसूचना पर 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। प्राप्त सुझावों की समीक्षा के बाद नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो ‘गोल्डन ऑवर’ के दौरान मरीज तक चिकित्सा सहायता पहुंचाना आसान होगा और विशेषकर ग्रामीण तथा दुर्गम क्षेत्रों में अनेक लोगों की जान बचाई जा सकेगी।

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