राजधानियों में भवन कानून के उल्लंघन पर मांगी जाएगी रिपोर्ट; PG, हॉस्टल और छात्र आवास भी जांच के दायरे में
नई दिल्ली, 10 सितंबर। वाय के न्यूज़।
दिल्ली के सत्य निकेतन में PG की पांच मंजिला इमारत गिरने के हादसे के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भवन सुरक्षा और नियमों के पालन का मुद्दा व्यापक स्तर पर उठाया है। अदालत ने संकेत दिया है कि देश की सभी राज्यों की राजधानियों में भवन निर्माण से जुड़े नियमों के उल्लंघन की स्थिति की जानकारी ली जा सकती है।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने दिल्ली में PG और निजी छात्रावासों की सुरक्षा जांच का मुद्दा रखा गया था। अब सुप्रीम कोर्ट इस समस्या को केवल दिल्ली तक सीमित रखने के बजाय देशव्यापी स्तर पर देखने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
भवन की मंजूरी से लेकर इस्तेमाल तक जांच
सुरक्षा जांच में यह देखा जाना है कि किसी भवन को स्वीकृत नक्शे के अनुसार बनाया गया है या नहीं, मंजिलों की संख्या स्वीकृत सीमा के भीतर है या नहीं और भवन का इस्तेमाल निर्धारित नियमों के अनुसार हो रहा है या नहीं।
PG और हॉस्टल के मामले में संरचनात्मक सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा, बेसमेंट और भूमि उपयोग जैसे पहलू भी महत्वपूर्ण होंगे। दिल्ली हाईकोर्ट पहले ही MCD को अपने क्षेत्र के PG और हॉस्टलों का निरीक्षण कर भवन नियमों और निर्माण अनुमति के पालन की रिपोर्ट देने का निर्देश दे चुका है।
सत्य निकेतन हादसे में सात लोगों की मौत
6 सितंबर को दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला PG इमारत गिर गई थी। हादसे में सात लोगों की मौत हुई और कम से कम 12 लोगों को बचाकर अस्पताल पहुंचाया गया।
इमारत में निर्माण संबंधी काम चल रहा था और तहखाने के आसपास जलभराव की भी जानकारी सामने आई थी। हालांकि, इमारत गिरने की वास्तविक वजह अभी जांच के अधीन है।
जवाबदेही सिर्फ भवन मालिक तक सीमित नहीं
दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इस मामले में कहा है कि भवन निर्माण या मरम्मत के काम में नियमों का पालन सुनिश्चित करना संबंधित स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी है। अदालत ने MCD को यह पता लगाने के निर्देश दिए हैं कि गिरी हुई इमारतें वैध मंजूरी के तहत बनी थीं या नहीं और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
सुप्रीम कोर्ट के रुख से अब भवन सुरक्षा, अवैध निर्माण और PG-हॉस्टल में रहने वाले लोगों की सुरक्षा का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर उठने की संभावना है।
