14 साल की छात्रा की सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, FIR पर कार्रवाई के निर्देश

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CJP प्रदर्शन से जुड़े मामले में यूपी और दिल्ली से स्टेटस रिपोर्ट मांगी; नाबालिग और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा

नई दिल्ली, 10 सितंबर। वाय के न्यूज़।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामले में 14 साल की एक छात्रा को कथित तौर पर डराने-धमकाने और उसके घर पर पथराव के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सख्त रुख अपनाया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने उत्तर प्रदेश और दिल्ली से मामले की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है।

पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। अदालत ने FIR की स्थिति, नाबालिग और उसके परिवार की सुरक्षा तथा कथित हमले और धमकी के मामले में की गई कार्रवाई का विवरण मांगा।

FIR पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश

सुनवाई के दौरान एडवोकेट टी. भल्ला ने छात्रा की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने अदालत को बताया कि संसद मार्ग पुलिस थाने में छात्रा की FIR दर्ज है और उसके घर पर कथित पथराव से जुड़े वीडियो भी उपलब्ध हैं।

अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से FIR पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने और छात्रा तथा उसके परिवार को पर्याप्त सुरक्षा देने को कहा। न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि FIR पर तत्काल कार्रवाई की जाए और उत्तर प्रदेश पुलिस परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराए।

वीडियो में हमले का दावा करने का आरोप

अदालत को बताया गया कि हाल में एक व्यक्ति ने वीडियो में कथित तौर पर दावा किया था कि उसने CJP प्रदर्शन के दौरान छात्रा के पिता पर हमला किया था। सुनवाई में उस व्यक्ति की पहचान स्वतंत्र भारद्वाज के रूप में बताई गई और कहा गया कि उसे गिरफ्तार कर हिरासत में भेजा गया है।

वकील की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि प्रदर्शनकारियों पर कथित हमले से जुड़े वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी भी दिखाई दे रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है। इन आरोपों पर अदालत ने संबंधित रिपोर्ट मांगी है।

‘बच्चा, बच्चा ही होता है’

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया पर छात्रा की ओर से किए गए पोस्ट के जरिए मामले की जानकारी है। इस दौरान छात्रा को ‘कमजोर पीड़ित’ बताए जाने पर उन्होंने आपत्ति जताई।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि बच्चा, बच्चा ही होता है और उसकी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं। अदालत ने कहा कि नाबालिग को डराने-धमकाने के आरोपों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

अक्षत त्रिपाठी की याचिका भी सुनवाई में उठी

इसी सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता पी.वी. दिनेश ने गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के छात्र अक्षत त्रिपाठी की याचिका का भी उल्लेख किया। यह याचिका ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट द्वारा जारी उस नोटिस के खिलाफ है, जिसे बाद में वापस ले लिया गया।

दिनेश ने अदालत से इस मामले को भी सुनवाई के लिए लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में अधिकारियों के लिए कड़ा संदेश जाना जरूरी है।

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