छात्र को 5 लाख के बॉन्ड का नोटिस देने वाला मजिस्ट्रेट निलंबित

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सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दी जानकारी; अक्षत त्रिपाठी ने नोटिस को चुनौती दी थी

नई दिल्ली, 10 सितंबर। वाय के न्यूज़।

गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के छात्र अक्षत त्रिपाठी को विरोध-प्रदर्शन से जोड़कर 5 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड भरने का नोटिस जारी करने वाले ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को निलंबित कर दिया गया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में यह जानकारी दी।

यह मामला 4 सितंबर को जारी उस नोटिस से जुड़ा है, जिसमें त्रिपाठी को छह महीने तक शांति बनाए रखने के लिए 5 लाख रुपये का निजी बॉन्ड और इतनी ही राशि की दो जमानतें देने को कहा गया था। नोटिस में उन्हें 5 सितंबर को पेश होने के लिए कहा गया था।

पुलिस रिपोर्ट के आधार पर जारी हुआ था नोटिस

पुलिस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि त्रिपाठी छात्रों के बीच सरकार-विरोधी और भ्रामक बातें फैला रहे थे और उन्हें कॉकरोच जनता पार्टी के प्रस्तावित धरने में शामिल होने के लिए उकसा रहे थे। रिपोर्ट में इससे तनाव पैदा होने और छात्रों के बीच विवाद की आशंका जताई गई थी।

नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धाराओं 126 और 135 के तहत शुरू हुई कार्यवाही के बाद जारी किया गया था। त्रिपाठी ने आरोपों से इनकार किया और नोटिस को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

त्रिपाठी ने प्रक्रिया पर उठाए सवाल

याचिका में कहा गया कि नोटिस में किसी खास तारीख, समय, बयान या ऐसी प्रत्यक्ष कार्रवाई का उल्लेख नहीं था, जिससे उनके कारण शांति भंग होने की आशंका स्पष्ट होती हो। यह भी कहा गया कि आरोपों के समर्थन में कोई सामग्री उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई।

याचिका के अनुसार, 4 सितंबर के नोटिस के बाद अगले ही दिन पेश होने को कहा गया, जिससे वकील करने और प्रस्तावित जमानत की व्यवस्था के लिए बहुत कम समय मिला। त्रिपाठी ने संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत अपने अधिकारों का भी हवाला दिया।

सुप्रीम कोर्ट में उठा मामला

मामला बुधवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने आया था। अदालत ने इस बात पर सवाल उठाया था कि पहले के आदेश के बावजूद छात्र के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई कैसे की गई और संबंधित अधिकारी से स्पष्टीकरण लेने की बात कही थी।

इसके बाद गुरुवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि संबंधित एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को निलंबित कर दिया गया है।

नोटिस पहले ही वापस लिया जा चुका था

नोएडा पुलिस ने 5 सितंबर को कहा था कि वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में मामला आने के बाद नोटिस को रद्द कर दिया गया। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई BNSS की धाराओं 126 और 135 के तहत शांति बनाए रखने के लिए शुरू की गई थी।

यह मामला सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर के उस आदेश के बाद सामने आया, जिसमें जुलाई में कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े छात्र प्रदर्शनों के संबंध में दर्ज एफआईआर रद्द की गई थीं और छात्रों के खिलाफ आगे की कार्रवाई पर रोक से संबंधित निर्देश दिए गए थे। त्रिपाठी की याचिका में इसी आदेश का हवाला देते हुए अपने खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही को चुनौती दी गई है।

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