NTA पर संसद गर्म, 47 कर्मचारियों की बर्खास्तगी से लेकर पुनर्गठन तक सवाल

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नई दिल्ली, 29 जुलाई 2026, वाय के न्यूज। लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर लोकसभा में हुई चर्चा के दौरान राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली, परीक्षा सुधार, पेपर लीक की घटनाओं के बाद उठाए गए कदम और जवाबदेही का मुद्दा प्रमुखता से उठा। सरकार ने जहां NTA में सुधारात्मक कदमों और सख्त कार्रवाई का ब्योरा दिया, वहीं विपक्ष ने एजेंसी की कार्यप्रणाली और शीर्ष स्तर की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए।

47 कर्मचारियों पर कार्रवाई का सरकार ने दिया ब्योरा

केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी को गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदारी तय करने की दिशा में कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि NTA से जुड़े 47 कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

सरकार का कहना था कि परीक्षा संचालन में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।

NTA के पुनर्गठन और सुधारों का उल्लेख

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि NTA की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए व्यापक समीक्षा की गई है। परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए प्रशासनिक और तकनीकी सुधार किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सुधारों का उद्देश्य केवल पेपर लीक रोकना नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करना है।

हाई पावर कमेटी की सिफारिशों पर चर्चा

सरकार ने परीक्षा सुधारों के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति (High Powered Committee) का उल्लेख करते हुए कहा कि समिति ने परीक्षा सुरक्षा, तकनीकी व्यवस्था, निगरानी और संस्थागत सुधारों को लेकर सुझाव दिए हैं।

इन सुझावों के आधार पर परीक्षा केंद्रों की निगरानी, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और परीक्षा संचालन की प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

विपक्ष ने उठाए NTA की जवाबदेही पर सवाल

कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के सदस्यों ने कहा कि केवल कानून को कठोर बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने NTA की कार्यप्रणाली और प्रबंधन स्तर पर जवाबदेही तय करने की मांग की।

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि सरकार को परीक्षा व्यवस्था में वास्तविक सुधार करने होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल संशोधन विधेयक लाने से छात्रों का विश्वास वापस नहीं आएगा।

समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने NEET-UG पेपर लीक का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि जब परीक्षा सुरक्षा के लिए कानून मौजूद था, तब भी पेपर लीक कैसे हुआ।

डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने भी NEET व्यवस्था और परीक्षा संचालन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

NTA अध्यक्ष की भूमिका पर भी उठे सवाल

बहस के दौरान विपक्षी सदस्यों ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी के लिए केवल कर्मचारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि निर्णय लेने वाले उच्च स्तर के अधिकारियों और एजेंसी के नेतृत्व की भूमिका की भी समीक्षा होनी चाहिए।

सत्ता पक्ष ने कहा कि सरकार ने जवाबदेही तय करने और व्यवस्था सुधारने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए हैं।

सरकार का दावा : छात्रों के भविष्य से समझौता नहीं

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि लोक परीक्षा कानून में संशोधन, फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था और NTA सुधारों का उद्देश्य छात्रों के हितों की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार युवाओं के भविष्य से कोई समझौता नहीं करेगी।

लोकसभा में इस मुद्दे पर हुई चर्चा में स्पष्ट रहा कि NTA की विश्वसनीयता, परीक्षा सुधार और पेपर लीक पर जवाबदेही आने वाले समय में भी राजनीतिक और नीतिगत बहस का प्रमुख विषय बने रहेंगे।

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