नई दिल्ली, 29 जुलाई 2026, वाय के न्यूज। लोकसभा में आज लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा फिर से शुरू होगी। केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को विधेयक सदन में विचार और पारित कराने के लिए पेश किया था, लेकिन विस्तृत चर्चा पूरी नहीं होने के कारण इसे आज आगे बढ़ाया जाएगा।
विधेयक का उद्देश्य लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 को और अधिक प्रभावी बनाना है। प्रस्तावित संशोधनों में पेपर लीक और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी के मामलों में 10 वर्ष तक के कारावास, 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने और दोषियों की संपत्ति जब्त करने जैसे कड़े प्रावधान शामिल हैं।
विधेयक में यह भी व्यवस्था की गई है कि प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जा सकेंगे। साथ ही, एफआईआर दर्ज होने के दो महीने के भीतर जांच पूरी करने और आरोपपत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा करने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार का पक्ष
विधेयक पेश करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह कानून छात्रों और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि युवाओं के भविष्य से किसी प्रकार का समझौता न हो। उन्होंने कांग्रेस और यूपीए शासनकाल के दौरान हुई पेपर लीक घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय इस प्रकार का कोई व्यापक कानून नहीं था।
विपक्ष ने उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा क्षेत्र में वास्तविक सुधार करने के बजाय केवल कानून में संशोधन कर दिखावटी कदम उठा रही है।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष एवं सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि लोक परीक्षा अधिनियम, 2024 लागू होने के बावजूद इस वर्ष NEET-UG का प्रश्नपत्र लीक हो गया, जिससे कानून की प्रभावशीलता पर सवाल उठते हैं।
डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने कहा कि मूल समस्या नीट परीक्षा प्रणाली है, जो उनके अनुसार छात्रों के हितों के अनुकूल नहीं है।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सरकार पर छात्रों का विश्वास खोने का आरोप लगाया और शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का मुद्दा उठाया। उनके कुछ आरोपों पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताते हुए उनसे आरोपों के समर्थन में प्रमाण देने या सदन से माफी मांगने की मांग की, जिससे सदन में तीखी नोकझोंक हुई।
सत्तापक्ष का समर्थन
भाजपा सांसद बंसुरी स्वराज ने विधेयक को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने वाला “क्रांतिकारी कदम” बताया। उन्होंने कहा कि संगठित परीक्षा माफिया अब अंतरराज्यीय आपराधिक नेटवर्क का रूप ले चुका है और उससे निपटने के लिए कठोर कानून आवश्यक है।
भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा कि देश के छात्र राजनीति नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जो उनके भविष्य की रक्षा करे और निष्पक्ष परीक्षा सुनिश्चित करे।
तेलुगु देशम पार्टी के लावु श्री कृष्ण देवरायलु, शिवसेना के डॉ. श्रीकांत शिंदे तथा तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी ने भी चर्चा में भाग लिया। टीडीपी सांसद ने प्रश्नपत्र तैयार करने वाली समितियों के विकेंद्रीकरण का सुझाव भी दिया।
इसके अलावा अनुराग ठाकुर, सुप्रिया सुले, डिंपल यादव, के.सी. वेणुगोपाल, एस. वेंकटेशन, असदुद्दीन ओवैसी, हरसिमरत कौर बादल सहित अनेक सदस्यों ने अपने विचार रखे।
चर्चा पूरी नहीं होने पर पीठासीन अधिकारी संध्या राय ने लोकसभा की कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी थी। आज चर्चा पूरी होने के बाद सरकार विधेयक को पारित कराने का प्रयास करेगी।
