MMDR संशोधन से राज्यों के खनिज राजस्व में कमी नहीं होगी: केंद्र

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नई दिल्ली, 20 अगस्त। वाय के न्यूज। खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 को लेकर केंद्र सरकार ने कहा है कि संशोधन से खनिज-समृद्ध राज्यों के राजस्व पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। सरकार के अनुसार, राज्यों को रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) और जीएसटी सहित मौजूदा राजस्व स्रोतों से हिस्सेदारी मिलती रहेगी।

खान मंत्रालय और कोयला मंत्रालय की ओर से जारी FAQ में कहा गया है कि वर्तमान व्यवस्था में राज्यों को खनन क्षेत्र से होने वाली आय का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा मिलता है। सरकार के अनुसार, पिछले दशक में कुल खनिज राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी लगभग 28 प्रतिशत अंक बढ़ी है और 2025-26 में यह करीब ₹1,14,549.28 करोड़ तक पहुंची।

14 तरह के कर और शुल्क से राज्यों को आय

केंद्र के अनुसार, राज्य सरकारें खनन गतिविधियों से लगभग 14 प्रकार के कर, शुल्क, फीस और अन्य वसूली करती हैं। इनमें रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, डेड रेंट, जिला खनिज प्रतिष्ठान को भुगतान, जीएसटी और पारगमन शुल्क शामिल हैं।

FAQ में यह भी कहा गया है कि कुछ राज्यों ने खनिज वाली जमीन पर अतिरिक्त कर लगाए हैं। सरकार का दावा है कि कुछ मामलों में ऐसे कर 20 प्रतिशत तक हैं और इससे खनन तथा खनिज आधारित सरकारी कंपनियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता है।

2015 के बाद 723 बड़े खनिज ब्लॉकों की नीलामी

सरकार के अनुसार, 2015 में MMDR अधिनियम में संशोधन के बाद खनिज रियायतों के आवंटन में नीलामी व्यवस्था लागू की गई। इसके बाद 17 राज्यों में 723 बड़े खनिज ब्लॉकों की नीलामी की गई है।

इनमें राजस्थान में 140, मध्य प्रदेश में 127 और ओडिशा में 76 ब्लॉक शामिल हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 212 ब्लॉकों की नीलामी और 36 ब्लॉकों के संचालन में आने का दावा किया गया है।

कोयला क्षेत्र में 141 खदानों की नीलामी और 23 के संचालन में आने की जानकारी भी दी गई है।

उत्पादन बढ़ने का दावा

केंद्र के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में प्रमुख खनिजों के उत्पादन का मूल्य 26.8 प्रतिशत बढ़ा। इस दौरान लौह अयस्क का उत्पादन 313 मिलियन टन और चूना पत्थर का उत्पादन 484 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा।

सरकार के अनुसार, भारत चूना पत्थर उत्पादन में दुनिया में दूसरे, जस्ता उत्पादन में तीसरे, लौह अयस्क में चौथे और बॉक्साइट उत्पादन में पांचवें स्थान पर है।

क्रिटिकल मिनरल्स पर जोर

सरकार ने 29 जनवरी 2025 को मंजूर नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन के तहत वित्त वर्ष 2030-31 तक ₹16,300 करोड़ का प्रावधान बताया है। इसमें ₹2,600 करोड़ की बजटीय सहायता शामिल है।

सरकार के अनुसार, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) और राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण एवं विकास ट्रस्ट (NMET) 1,200 क्रिटिकल मिनरल परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं।

इसके अलावा, खनिज बिदेश इंडिया लिमिटेड (KABIL) को अर्जेंटीना में लिथियम अन्वेषण के विशेष अधिकार मिलने की जानकारी दी गई है।

DMF के जरिए खनन प्रभावित क्षेत्रों में खर्च

FAQ में कहा गया है कि 2015 में जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) की व्यवस्था शुरू की गई थी, ताकि खनन से प्रभावित लोगों और क्षेत्रों तक खनन से प्राप्त राजस्व का लाभ पहुंचाया जा सके।

सरकार के अनुसार, देश में 656 DMF बनाए गए हैं, जिनमें 106 आकांक्षी जिलों में हैं। DMF के माध्यम से सड़क, अस्पताल, स्कूल, पेयजल और अन्य स्थानीय बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं को वित्त दिया जाता है।

केंद्र का तर्क—स्थिर कर व्यवस्था से निवेश बढ़ेगा

केंद्र का कहना है कि खनन परियोजनाओं में भारी शुरुआती निवेश और लंबी अवधि की परियोजना-आयु को देखते हुए कर एवं शुल्क व्यवस्था में निश्चितता जरूरी है। सरकार के अनुसार, स्थिर कर ढांचा निवेश आकर्षित करने, क्रिटिकल मिनरल्स का घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा।

सरकार ने यह भी कहा है कि संशोधन किसी विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए नहीं है। उसके अनुसार, इसका उद्देश्य खनन क्षेत्र में लेवी और करों को लेकर स्पष्ट कानूनी ढांचा तैयार करना, विवाद कम करना और निवेश के लिए निश्चितता बढ़ाना है।

माइनर मिनरल्स संशोधन के दायरे से बाहर

केंद्र ने स्पष्ट किया है कि 2026 का संशोधन उन माइनर मिनरल्स पर लागू नहीं होगा जिन्हें राज्य सरकारें पूरी तरह नियंत्रित और विनियमित करती हैं। FAQ में रेत, बजरी, मिट्टी, सिलिका, ग्रेनाइट, मार्बल, जिप्सम और लैटेराइट सहित करीब 50 माइनर मिनरल्स का उल्लेख किया गया है।

सरकार के अनुसार, इन खनिजों के नियमन, प्रशासन और उन पर कर लगाने की राज्यों की मौजूदा शक्तियां इस संशोधन से प्रभावित नहीं होंगी।

स्रोत: खान मंत्रालय और कोयला मंत्रालय द्वारा जारी PIB FAQ

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