सरकारी भर्तियों में निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका, झारखंड से कई राज्यों तक फैला सवाल

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रांची/नई दिल्ली, 20 अगस्त। वाय के न्यूज। सरकारी भर्ती परीक्षाओं के संचालन में निजी कंपनियों की भूमिका देश के कई राज्यों में सामने आई है। आवेदन और आंकड़ा प्रसंस्करण से लेकर परीक्षा केंद्रों के संचालन, बायोमेट्रिक सत्यापन, प्रश्नपत्रों की छपाई और परिवहन, ओएमआर की स्कैनिंग तथा परिणाम तैयार करने तक अलग-अलग काम निजी सेवा प्रदाताओं को दिए जा रहे हैं। झारखंड में टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड यानी टीडीपीएल से जुड़ी परीक्षाओं पर हुई कार्रवाई ने इस व्यवस्था को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, ओडिशा और महाराष्ट्र में भी अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं में निजी एजेंसियों या सेवा प्रदाताओं की भूमिका जांच और विवादों के संदर्भ में सामने आ चुकी है। इन मामलों में कंपनियां, परीक्षाएं और आरोप अलग-अलग हैं, लेकिन सरकारी भर्ती प्रक्रिया में बाहरी एजेंसियों की भागीदारी इन सभी मामलों में एक साझा तथ्य के रूप में दिखाई देती है।

झारखंड में टीडीपीएल की परीक्षाएं जांच के घेरे में

झारखंड सरकार ने टीडीपीएल द्वारा वर्ष 2014 से कराई गई परीक्षाओं, उनके परिणामों और नियुक्तियों को जांच के दायरे में लेने का फैसला किया है। जेएसएससी-सीजीएल सहित टीडीपीएल से जुड़ी परीक्षाओं को लेकर कार्रवाई की गई है। रिपोर्टों के अनुसार 22 भर्ती परीक्षाएं रद्द करने और 17 अन्य भर्ती प्रक्रियाओं की जांच का निर्णय लिया गया है।

इस कार्रवाई का असर उन अभ्यर्थियों पर भी पड़ा है जिन्होंने संबंधित परीक्षाओं के परिणाम के आधार पर सरकारी नौकरी प्राप्त की थी। परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच के साथ अब इन नियुक्तियों की स्थिति भी इस पूरे मामले से जुड़ गई है।

मामला एक परीक्षा से बढ़कर पुरानी परीक्षाओं तक

टीडीपीएल से संबंधित कार्रवाई का दायरा केवल जेएसएससी-सीजीएल तक सीमित नहीं है। सरकार द्वारा वर्ष 2014 से कंपनी से जुड़ी परीक्षाओं की समीक्षा किए जाने की जानकारी सामने आई है।

इसमें संबंधित परीक्षाओं के आयोजन, परिणाम, नियुक्तियों और कंपनी को दिए गए काम की प्रक्रिया को देखा जा रहा है।

जांच में परीक्षा संचालन, उत्तर कुंजी और ओएमआर से जुड़े आरोप भी सामने आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार यह भी जांच की जा रही है कि परीक्षा सामग्री और उत्तर कुंजी संबंधित लोगों तक किस माध्यम से पहुंची तथा उनका इस्तेमाल किस प्रकार हुआ।

इन आरोपों की जांच जारी है और अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने आना बाकी है।

सरकारी परीक्षा में निजी कंपनी की भूमिका कितनी?

सरकारी भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया अब केवल प्रश्नपत्र तैयार करने और परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थियों को बैठाने तक सीमित नहीं है।

कई परीक्षाओं में निजी सेवा प्रदाताओं को आवेदन प्रक्रिया, प्रवेश पत्र, परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, अभ्यर्थी सत्यापन, कंप्यूटर आधारित परीक्षा, बायोमेट्रिक प्रक्रिया, ओएमआर की स्कैनिंग, आंकड़ा प्रसंस्करण और परिणाम से जुड़े काम दिए जाते हैं।

किसी परीक्षा में निजी कंपनी की वास्तविक भूमिका उसके अनुबंध और निविदा की शर्तों पर निर्भर करती है।

इसी वजह से किसी परीक्षा में अनियमितता की जांच के दौरान यह भी देखा जाता है कि संबंधित निजी एजेंसी को कौन-कौन से काम सौंपे गए थे और परीक्षा सामग्री तथा अभ्यर्थियों के आंकड़ों तक उसकी पहुंच किस स्तर तक थी।

दूसरे राज्यों में अलग-अलग मामले

राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं की ओएमआर उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग और ऑनलाइन परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी एजेंसियों की भूमिका जांच का विषय रही है। बिहार में परीक्षा संचालन से जुड़ी बाहरी एजेंसियों की भूमिका अलग-अलग मामलों में जांच के दायरे में आई। ओडिशा में प्रश्नपत्र तैयार करने, छापने और उसके परिवहन से जुड़ी निजी एजेंसी की भूमिका की जांच हुई। महाराष्ट्र में प्रश्नपत्र छापने वाली निजी संस्था से संबंधित मामले में जांच सामने आई।

उत्तर प्रदेश में भी सरकारी भर्ती और परीक्षा संबंधी कार्यों में निजी कंपनियों को काम दिए जाने के मामले मौजूद हैं और कुछ मामलों में निजी एजेंसियों की भूमिका को लेकर न्यायिक रिकॉर्ड में आरोप दर्ज हुए हैं।

इन सभी मामलों को एक ही प्रकार का घोटाला या एक ही कंपनी से जुड़ा मामला नहीं कहा जा सकता। अलग-अलग राज्यों में जांच के विषय और आरोप अलग हैं।

लेकिन इससे यह तथ्य सामने आता है कि सरकारी भर्ती परीक्षा की पूरी प्रक्रिया में निजी कंपनियों की भूमिका कई राज्यों में मौजूद है।

प्रश्नपत्र से परिणाम तक निजी भागीदारी

भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया में निजी कंपनी की भूमिका अलग-अलग स्तरों पर हो सकती है। कहीं कंपनी केवल तकनीकी सुविधा उपलब्ध कराती है तो कहीं परीक्षा संचालन, आंकड़ा प्रसंस्करण या उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग जैसे काम भी उसके जिम्मे होते हैं।

कुछ निविदाओं में निजी एजेंसी को परीक्षा की पूरी प्रक्रिया से जुड़े कई काम एक साथ दिए जाने का प्रावधान होता है।

इस व्यवस्था में प्रश्नपत्र, उत्तर पुस्तिका, ओएमआर, अभ्यर्थी आंकड़े और परिणाम संबंधी जानकारी अलग-अलग चरणों से गुजरती है। इसलिए किसी मामले की जांच में संबंधित एजेंसी के अनुबंध की शर्तें और उसे दी गई वास्तविक जिम्मेदारियां महत्वपूर्ण हो जाती हैं।

टीडीपीएल को काम कैसे मिला?

झारखंड के मामले में टीडीपीएल को परीक्षा संबंधी काम दिए जाने की प्रक्रिया भी जांच का हिस्सा है।

कंपनी की पात्रता, उसे दिए गए अनुबंध, काम का दायरा और संबंधित सरकारी अधिकारियों की भूमिका को लेकर जांच की जा रही है। रिपोर्टों में कंपनी को कुछ परीक्षा संबंधी काम दिए जाने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

यह निर्धारित होना बाकी है कि संबंधित प्रक्रियाओं में नियमों का पालन हुआ था या नहीं और किसी स्तर पर अनियमितता हुई थी या नहीं।

नियुक्त अभ्यर्थियों की स्थिति

टीडीपीएल से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने की कार्रवाई का सीधा असर चयनित अभ्यर्थियों पर पड़ा है।

जिन लोगों ने परीक्षा पास करके नियुक्ति हासिल की थी, उनकी स्थिति अब संबंधित परीक्षाओं की जांच और सरकार के आगे के फैसले से जुड़ी है।

इस मामले में परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी की भूमिका, परीक्षा की वैधता और नियुक्त अभ्यर्थियों के अधिकार अलग-अलग कानूनी और प्रशासनिक प्रश्न हैं।

अभ्यर्थी आंकड़े और परीक्षा सामग्री भी जांच का हिस्सा

भर्ती परीक्षा में इस्तेमाल होने वाले अभ्यर्थियों के आंकड़े और परीक्षा सामग्री संवेदनशील दस्तावेज होते हैं।

आवेदन से संबंधित व्यक्तिगत जानकारी के अलावा कुछ परीक्षाओं में बायोमेट्रिक जानकारी भी एकत्र की जाती है। इसी तरह प्रश्नपत्र, ओएमआर, उत्तर पुस्तिका और उत्तर कुंजी परीक्षा प्रक्रिया के महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं।

टीडीपीएल मामले में जांच का एक हिस्सा यह भी है कि संबंधित परीक्षा सामग्री किसके नियंत्रण में थी और वह निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किस-किस स्तर से होकर गुजरी।

सवाल अब निजी कंपनियों की मौजूदगी से आगे

सरकारी भर्ती परीक्षाओं में निजी कंपनियों का इस्तेमाल कई वर्षों से अलग-अलग रूपों में होता रहा है। टीडीपीएल प्रकरण में जांच के बाद ध्यान इस बात पर है कि संबंधित कंपनी को कौन-कौन से काम दिए गए, उन कामों के दौरान परीक्षा सामग्री और आंकड़ों तक उसकी पहुंच क्या थी और संबंधित प्रक्रियाओं में नियमों का पालन हुआ या नहीं।

झारखंड में वर्ष 2014 से जुड़ी परीक्षाओं की समीक्षा का दायरा बढ़ने के साथ यह मामला कंपनी से संबंधित आरोपों, परीक्षा संचालन, सरकारी अनुबंधों, परिणामों और नियुक्तियों तक पहुंच गया है।

दूसरे राज्यों में सामने आए अलग-अलग मामलों के साथ इसे देखने पर सरकारी भर्ती परीक्षाओं में निजी सेवा प्रदाताओं की भूमिका का दायरा भी स्पष्ट होता है। अलग-अलग मामलों की जांच और उनके निष्कर्ष संबंधित राज्यों की जांच एजेंसियों, अदालतों और सरकारों के रिकॉर्ड से तय होंगे।

फिलहाल उपलब्ध घटनाक्रम यह दिखाता है कि सरकारी भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया में निजी कंपनियों की भूमिका केवल परीक्षा केंद्र के संचालन तक सीमित नहीं है और कई राज्यों में यह भूमिका परीक्षा की अलग-अलग संवेदनशील प्रक्रियाओं तक फैली हुई है।

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