JPSC विवाद में नया मोड़: हाईकोर्ट की रोक से नियुक्त अभ्यर्थियों को राहत, आंदोलनकारी जांच की मांग पर कायम

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रांची, 20 अगस्त। वाय के न्यूज। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे विवाद में गुरुवार को नया मोड़ आ गया। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा और संबंधित नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले पर अगले आदेश तक रोक लगा दी। अदालत ने चयनित अभ्यर्थियों को बहाल करने का निर्देश देते हुए कहा कि उचित प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना उन्हें हटाया नहीं जा सकता।

न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने इस मामले में दायर तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग से जवाब मांगा है। इनमें दो याचिकाएं 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा और नियुक्तियों को रद्द करने के खिलाफ हैं, जबकि तीसरी फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती से संबंधित है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में कहा गया कि 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा के जरिए चयनित 342 अभ्यर्थी नियुक्त होकर काम कर रहे हैं। उनका तर्क था कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आधार पर सभी चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां सामूहिक रूप से रद्द नहीं की जा सकतीं। हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश से इन अभ्यर्थियों को फिलहाल राहत मिली है।

राज्य सरकार ने छात्रों के लंबे आंदोलन के बाद कथित अनियमितताओं की जांच के आधार पर कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया था। सरकार की कार्रवाई के पीछे परीक्षा प्रक्रिया में टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) की भूमिका समेत जांच में सामने आए तथ्यों को आधार बताया गया था। सरकार ने कई परीक्षाओं को रद्द करने, कुछ परीक्षा प्रक्रियाओं को रोकने और अन्य को जांच के दायरे में रखने की घोषणा की थी।

आंदोलन स्थगित, लेकिन मांगें कायम

इस बीच जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने 26 दिन के आंदोलन के बाद बुधवार को अपना आंदोलन दो महीने के लिए स्थगित किया था। मंच का कहना था कि सरकार ने उसकी कुछ प्रमुख मांगें स्वीकार की हैं और कथित परीक्षा अनियमितताओं तथा व्यवस्था में सुधार के लिए समय मांगा है। हालांकि आंदोलन समाप्त नहीं किया गया है। मंच ने स्पष्ट किया है कि दो महीने में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन का दूसरा चरण शुरू किया जाएगा।

आंदोलनकारी अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की जांच, परीक्षा व्यवस्था में सुधार और कुछ मामलों में सीबीआई जांच शामिल है। हाईकोर्ट द्वारा नियुक्तियां रद्द करने के सरकारी फैसले पर रोक लगाए जाने के बाद भी यह मांग बनी हुई है। इसी बीच 20 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में झारखंड की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र और समयबद्ध सीबीआई जांच की मांग को लेकर एक याचिका भी दाखिल की गई है।

इस तरह हाईकोर्ट के आदेश के बाद विवाद का एक नया पक्ष सामने आया है। एक ओर कथित अनियमितताओं की जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग कर रहे आंदोलनकारी हैं, वहीं दूसरी ओर परीक्षा के जरिए चयनित अभ्यर्थी बिना व्यक्तिगत दोष साबित किए नियुक्तियां रद्द किए जाने का विरोध कर रहे हैं। अब सरकार और जेपीएससी के जवाब तथा 15 सितंबर की सुनवाई से मामले की अगली दिशा तय होगी।

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